पूर्वांचल सूर्य प्रतिनिधि,गिरिडीह।गिरिडीह की डुमरी विधानसभा झारखण्ड की हॉट सीट इसलिए मानी जाती रही है क्योंकि इस सीट पर लंबे समय से झामुमो का कब्जा रहा है।इस सीट पर रहकर ही पार्टी में बोकारो जिले के नावाडीह थाना क्षेत्र अंतर्गत एक छोटे से गांव अलारगो निवासी जगरनाथ महतो ने राज्य में मंत्री पद तक का सफर तय किया था।
उल्लेखनीय है कि डुमरी विधानसभा पर लगातार कब्जा जमाते हुए जगरनाथ महतो ने पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा और कर्मठता को सिद्ध करने का काम किया था,जिससे वर्तमान डुमरी विधानसभा चुनाव में भी पूर्व की भांति कांग्रेस के साथ गठबंधन में रहकर यह सीट जेएमएम के हिस्से में जाती रही है।यह बात दीगर है कि बीजेपी भी इस सीट को हॉट सीट मानती है।इस सीट पर जीत हासिल करने के लिए हर बार काफी जुगत भिड़ाते रहे हैं।किंतु भाजपा के स्थानीय नेताओं की सक्रियता अधिकांशतः हर बार विधानसभा चुनाव के समय ही दिखती है।टिकट के लिए दावेदारों की लंबी लाइन लगने लगती है।
इस बार एनडीए गठबंधन ने डुमरी विधानसभा में आजसू पार्टी के उम्मीदवार को उतार कर फिर एक बार एक बड़ा रिस्क लिया है,क्योंकि पार्टी के प्रत्याशी को पूर्व में भी इस सीट पर कामयाबी नहीं मिल पाई थी।बताया जाता है कि इस सीट पर क्षेत्र के कई दिग्गजों ने भी आजसू पार्टी से टिकट के लिए जुगत भिड़ाया था,लेकिन पार्टी सुप्रीमो ने पुनः अपने पूर्व महिला प्रत्याशी पर ही भरोसा जताया है,जिससे यहां की आम जनता में एक अच्छा संकेत जाता दिख तो रहा है,लेकिन इससे बाकी दावेदारों के चेहरे उतर गए प्रतीत होते हैं,जिससे नाराज होकर क्षेत्र के केंद्रीय कमिटी के कई पदाधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से त्याग पत्र दे देने तक की घोषणा कर दी,जिससे इस विधानसभा क्षेत्र का एक खेमा उदासीन जरूर नजर आ रहा है।
बता दें कि पार्टी का टिकट इस विधानसभा से नहीं मिलने पर उक्त दावेदारों ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने का साहस भी कर लिया है।तो किसी ने सत्तारूढ़ दल का साथ लेना बेहतर समझा है।इस बदलाव से आजसू प्रत्याशी की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं।वे अपने संग रहे समर्थकों को मनाने में लगे हैं। वे घर घर जाकर रूठे समर्थकों को कह रहे कि इस बार हमें जीवन के इस अंतिम चुनाव लड़ने का मौका दें।कई तरह की मिन्नते अपने समर्थकों से की जा रही है। इधर बात गठबंधन दल में भाजपा की करें तो भाजपा के समर्पित कार्यकताओं की इस क्षेत्र में काफी कमी रही है।इस क्षेत्र में भाजपा अपने कई पदाधिकारियों के निजी कारणों से कई खेमों में बिखरी नजर आती है,जिससे भाजपा के कार्यकर्ताओं तथा समर्थकों में असंतोष की भावना देखी जा रही है।भाजपा से टिकट लेने की दौड़ में भाजपा के कई कार्यकर्ताओ ने चुप्पी साध ली थी, तो कई के नाम खुलकर सामने भी आए। भाजपा से नामांकन कराकर क्षेत्र के वरीय अधिवक्ता इंद्रजीत कुमार जायसवाल ने एक अच्छा संकेत दे दिया कि आज भी डुमरी विधानसभा क्षेत्र में निष्ठावान कार्यकर्ताओं की कमी नहीं है।
जहां तक मुस्लिम मतदाताओं के वोटों की बात है तो वोटों के ध्रुवीकरण की स्थिति बनती इसलिए नहीं दिख रही है क्योंकि ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम से दरकिनार क्षेत्र के नेता ने इस बार दूसरे मोर्चे के साथ मोर्चा खोला है तो वहीं उसी पार्टी में रहे तेज तर्रार वाकपटु युवा नेता ने भी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ताल ठोक दिया है।
इधर करिश्माई भीड़ इकठ्ठा कर लेने वाले अपनी जादुई बातों से तीसरे विकल्प की बात करने वाले युवा नेता वास्तव में करामात दिखा पाते हैं कि नहीं,यह तो चुनाव परिणाम के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बात पर विश्वास करें तो उन्होंने स्वीकार किया है कि राजनीतिक दल चुनाव के दौरान कई ऐसे वादे मतदाता से कर बैठते हैं जो उनके सामर्थ्य में भी नहीं होते। मान मनौव्वल का दौर जारी है।देखना है ऊंट किस करवट बैठता है।चुनाव तो राज्य में दूसरे चरण में 20 नवंबर को होना है।इस सीट पर चुनावी मैदान में खड़े 12 उम्मीदवारों के अभी तो हौसले बुलंद ही हैं। तब तक मतदाता ही राजा हैं।





