बस्ती।उत्तर प्रदेश में रामचरितमानस को लेकर माहौल गर्म है, कहीं श्री रामचरितमानस की प्रतियां फाड़ी और जलाई जा रही हैं तो कहीं श्रीरामचरितमानस को लेकर विवादित बयान दिया जा रहा है,लेकिन श्रीरामचरितमानस की यही पंक्तियां लोगों के लिए जीवन दायिनी बन रही हैं,मन को शांत रखने में उपयोगी साबित हो रही है और लोगों को अवसाद से बचा रही हैं।
जानें कौन सी पंक्तियां दे रही अवसाद से मुक्ति
कहेहू तें कछु दु:ख घटि होई । काहि कहौं यह जान न कोई।।
अर्थात् अपने मन की पीड़ा को किसी के सामने कहने से भी दुःख दूर हो जाती है।
साइकोलाजिस्ट डॉक्टर एके दुबे बताते हैं कि 85 फीसदी लोग अवसाद में इसलिए जाते हैं,क्योंकि वो अपने अंदर के दर्द को किसी के सामने ला नहीं पाते हैं और अंदर ही अंदर परेशान रहते हैं और अपनी समस्या को बहुत बड़ी मान लेते हैं। उन्होंने बताया कि काउंसलिंग के दौरान अवसाद यानी डिप्रेशन से ग्रस्त मरीजों को रामचरितमानस की यही पंक्ति बार-बार दोहराने को कहा जाता है, जिससे मनोरोगी अपनी पीड़ा साझा करने लगते हैं और उनको फिर अवसाद से आराम भी मिलने लगता है।
पंडित सूरज तिवारी ने कहा कि श्रीरामचरितमानस एक पवित्र ग्रंथ है, इसके एक एक चौपाई में रहस्य छुपा है जो न सिर्फ मनुष्य को अच्छे रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है।अपितु उनके अंदर व्याप्त रोग दोष भी दूर करता है।
बता दें कि श्रीरामचरितमानस की इस चौपाई को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के गाइडलाइन में शामिल है।श्रीरामचरितमानस की इस चौपाई से न सिर्फ मन को शांति मिलती है, बल्कि मनोरोगी के इलाज में भी यह काफी सहायक है।





