अहमदाबाद के रहने वाले और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) आंदोलन से जुड़े रहे मनीष ब्रह्मभट्ट ने गुरुवार (3 सितंबर) को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिजीत दीपके के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एक नए गुट कॉकरोच जनता पार्टी डेमोक्रेटिक - CJP (D) के गठन की घोषणा की है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाने वाले ब्रह्मभट्ट ने आरोप लगाया कि CJP अब पूरी तरह से 'टीम केजरीवाल' बन चुकी है और यह जन-आंदोलन का सौदा कर रही है।

CJP नेतृत्व पर लगे मुख्य आरोप

  1. 'आप' से जुड़े 8 लोगों को दी जगह: ब्रह्मभट्ट का दावा है कि अभिजीत दीपके द्वारा गठित 12 सदस्यीय टीम में से 8 लोग आम आदमी पार्टी (AAP) से जुड़े हुए हैं। इसमें निष्ठावान कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर केवल दोस्तों और महिला मित्रों को शामिल किया गया है।
  2. अरविंद केजरीवाल से डील का दावा: उन्होंने आरोप लगाया कि अन्ना आंदोलन की तरह ही केजरीवाल ने इस आंदोलन को भी हाइजैक कर लिया है। दीपके और केजरीवाल के बीच डील हुई है, जिसके तहत CJP को 'आप' के प्रभाव में लाया जा रहा है।
  3. मनमाना निर्णय और प्रतिनिधित्व की कमी: कार्यकारिणी का चयन बिना किसी वॉलेंटियर या आंदोलनकारियों को विश्वास में लिए बंद कमरों में किया गया। इसमें मुस्लिम पुरुष चेहरे और सिख समुदाय से किसी को प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया।
  4. राज्यों के प्रतिनिधित्व को ठुकराया: कार्यकर्ताओं की मांग थी कि हर राज्य से 5 प्रतिनिधियों को टीम में शामिल किया जाए ताकि निर्णय लोकतांत्रिक हों, लेकिन इस प्रस्ताव को पूरी तरह से खारिज कर दिया गया।

'स्वराज' के वादे से भटकने का आरोप

मनीष ब्रह्मभट्ट ने अरविंद केजरीवाल के राजनीतिक अतीत पर हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी बनाने के दौरान जनता की मर्जी से उम्मीदवार चुनने और 'स्वराज' लाने का वादा किया गया था। लेकिन सत्ता में आते ही स्वराज कानून को दरकिनार कर पूर्ण राज्य के दर्जे का बहाना बनाया गया।

निष्कर्ष: CJP के भीतर से ही एक अलग लोकतांत्रिक धड़े के ऐलान से संगठन में एक बड़ा राजनीतिक विभाजन सामने आया है, जिससे CJP और अभिजीत दीपके की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।