प्रतिनिधि,बिष्णुगढ़। आदिवासी सेंगेल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह पूर्व सांसद सालखन मुर्मू के आह्वान पर गुरुवार को आहूत भारत बंद का असर हज़ारीबाग- बगोदर- बिष्णुगढ़ पथ पर बिष्णुगढ़ प्रखंड के सातमिल चौक में दिखा।यहां सेंगल के जिला अध्यक्ष बहाराम मरांडी के नेतृत्व में तपती धूप में सैकड़ों महिला पुरुष ने सातमिल समीप मुख्य पथ पर बैरिकेटिंग कर हाथ में विभिन्न स्लोगन लिखे तख्ती हाथ में लेकर आवागमन बाधित रखा।इस दौरान दोनों तरफ वाहनों की कतार लग गई। स्थानीय पुलिस प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद आवागमन चालू कराया गया।
इसके पहले लोगों को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष बहाराम मरांडी ने कहा कि एक साजिश के तहत 11 नवंबर 2020 को हेमंत सरकार बगैर राज्यपाल के सहमति हस्ताक्षर लिए सरना आदिवासी धर्म कोड अनुशंसा कर दिल्ली भेजने का काम की है। इसके अलावा राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त आदिवासी संथाली भाषा को झारखंड में अब तक प्रथम राजभाषा का दर्जा नहीं दिया जा रहा है। यह भी कहा कि गिरीडीह जिला अंतर्गत पारसनाथ पहाड़ पर आदिवासियों का ईश्वर मरांग बुरू है,जिसे राज्य सरकार ने पांच जनवरी 2023 को जैन धर्म के लोगों को सौंप दिया है,जिसे आदिवासी समाज कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे और सरकार को निर्णय पर पुनर्विचार करना होगा।उन्होंने कहा कि सरना धर्म लागू कराने को 30 जून 2023 को आयोजित हूल दिवस क्रांति दिवस पर विश्व सरना धर्म कोड जनसभा ब्रिगेड परेड मैदान में कर आवाज बुलंद किया जाएगा।
उक्त कार्यक्रम मे बिहार, बंगाल, असम, उड़ीसा, झारखंड, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश के नेपाल, भूटान, बांग्लादेश आदि देशों के आदिवासी जुटेंगे।जहां आदिवासी समाज को समाजिक, धार्मिक और राजनीतिक गुलामी से आजादी दिलाने का विगुल फुंका जाएगा।
इस मौके पर मुख्य रूप से सेंगेल बोकारो जोनल हेड आनन्द टुड्डू,जिला सरना धर्म मंडवा अध्यक्ष बाहाराम मराण्डी, इचाक प्रखण्ड परगना लालजी सोरेन,नावाडीह प्रखण्ड अध्यक्ष करमचंद मुर्मू,नावाडीह प्रखण्ड संयोजक जागेश्वर मुर्मू,डुमरी प्रखण्ड संयोजक सुगन बेसरा,शनिचर सोरेन, अर्जुन मरांडी,सोनू मुर्मू,लालजी मुर्मू,महेश टुड्डू,मंजू देवी,अनिशा टुड्डू,इंदु सोरेन,सविता मरांडी समेत काफी संख्या में लोग उपस्थित थे।





