रांची।यूक्रेन से मंगलवार को झारखंड लौटने के बाद हमारी अथॉरिटी (इंडियन अथॉरिटी) मैनेज कर रही है।
रामगढ़ की बेटी तेजस्विनी अमन ने बताया कि रूस और यूक्रेन के युद्ध की वजह से यूक्रेन के हालात बहुत खराब हैं और धीरे-धीरे हालात खराब होते जा रहे हैं।रोमानिया बॉर्डर पार करना और वहां तक पहुंचने में ही लोगों का दम निकल रहा हैं,लोग बेहोश हो रहे हैं।बॉर्डर पार करने में छह घंटे से लेकर एक दिन तक का समय लग रहा है।भागदौड़ करनी पड़ रही है, जिसमें चोटें भी लग रही है।डर का माहौल है।वहां के लोग डर का सामना कर रहे हैं। वो डर के मारे अंडरग्राउंड शेल्टर में रह रहे हैं।



तेजस्विनी अमन राजधानी रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर पहुंचते ही अपने पिता विनय कुमार पांडेय के गले से लिपट गईं। तेजस्विनी की आंखों में आंसू तो नहीं थे, लेकिन चेहरे पर एक डर था। तेजस्विनी ने कहा मैं घर पहुंच गई हूं, सेफ हूं, लेकिन खुश नहीं हूं।अभी काफी बच्चे वहां फंसे हुए हैं। सरकार उन्हें जल्द से जल्द बाहर निकाले।पहले सेंट्रल यूक्रेन में हमले हो रहे थे,लेकिन अब पश्चिमी इलाके में भी डर का माहौल है। वहां भी हालात ठीक नहीं हैं। सिविलियन पर भी अटैक हो रहा है।
हम 27 को रोमानिया बॉर्डर पहुंचे। उसके बाद शेल्टर में रूके थे। यहां हमें सभी सुविधाएं दी गईं,लेकिन वहां हालात ऐसे हैं, जब तक हम बॉर्डर पार नहीं कर जाते सिक्योरिटी का कोई भरोसा नहीं है।

रात भर यूक्रेन बार्डर पर खड़े रहे झारखंड के विद्यार्थी

यूक्रेन से मंगलवार की शाम रांची पहुंचे छात्र-छात्राओं ने बताया कि उन लोगों को यूक्रेन बार्डर पर रात भर खड़ा रखा गया।इसके बाद भी इंट्री नहीं मिली।बार्डर पर भारतीय दूतावास के प्रतिनिधि नहीं थे।सुबह में हम लोगों को भी इंट्री करने नहीं दिया।यूक्रेन बार्डर पर कभी कभी भारतीय छात्रों में एक या दो लोगों को ही इंट्री करने दिया जा रहा था।बाद में हम लोगों ने एक एजेंट के माध्यम से बार्डर इंट्री किया।इससे पहले भारतीय दूतावास हम लोगों से संपर्क कर रहा था, लेकिन जैसे ही हम लोग बार्डर के लिए निकले।उनसे संपर्क बंद हो गया। बार्डर पार करने के बाद रोमानिया जाकर भारतीय दूतावास के प्रतिनिधियों से मदद मिलनी शुरु हुई। इससे पहले वहां हम लोगों की हालात बहुत खराब थी। वहां कोई देखने सुनने वाला नहीं था।

8-10 किलोमीटर चलना पड़ रहा पैदल

छात्र छात्राओं ने बताया कि हम बस भी बुक कर रहे हैं, तो 8-10 किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है। बॉर्डर के पास जो रेस्टोरेंट हैं, वहीं बैठे कर लोग रात गुजार रहे हैं। बॉर्डर पर इंडियन के साथ-साथ अफ्रीका व अन्य देशों के लोग लाइन में खड़े हैं। शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से लोग टूट रहे हैं।