रांची।विधायक बंधु तिर्की के पहले झारखंड के पांच और विधायकों की सदस्यता जा चुकी है। उनके खिलाफ निचली अदालत ने भ्रष्टाचार और आपराधिक मामलों के खिलाफ सजा सुनायी है। बंधु तिर्की के पहले लोहरदगा के विधायक कमल किशोर भगत, सिल्ली के विधायक अमित महतो, कोलेबिरा के विधायक एनोस एक्का, गोमिया के विधायक योगेंद्र प्रसाद और राजधनवार के विधायक निजामुद्दीन अंसारी को निचली अदालत से दोषी करार दिए जाने और दो साल से ज्यादा सजा सुनाने के कारण विधानसभा की सदस्यता से हाथ धोना पड़ा था। कानून के तहत जिस निर्वाचित जन प्रतिनिधि के खिलाफ अदालत दो साल से ज्यादा की सजा सुनाती है, उसी समय से उनकी सदस्यता समाप्त हो जाती है। हालांकि इसके लिए वैधानिक प्रक्रिया अपनायी जाती है।

स्पीकर जारी करेंगे बर्खास्तगी का आदेश

निचली अदालत के फैसले की प्रति विधानसभा अध्यक्ष के पास पहुंचती है। अध्यक्ष इस फैसले पर कानूनी राय ले सकते हैं। लेकिन उन्हें फैसले की तारीख से ही विधायक को विधानसभा की सदस्यता से बर्खास्त करना होता है। बंधु तिर्की 2019 के चुनाव में मांडर विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित होकर आए हैं। फैसले की तारीख से जब उनकी सदस्यता जायेगी तो विधानसभा में मांडर की सीट 28 मार्च से ही खाली मानी जायेगी। विधानसभा से उनकी सदस्यता समाप्ति का आदेश जारी होते ही चुनाव आयोग को इसकी सूचना दी जायेगी। छह महीने के अंदर खाली सीट में उपचुनाव कराना होगा।

झामुमो के तीन, आजसू व झापा के 1-1 विधायक की जा चुकी है सदस्यता

झारखंड के पहले विधायक बंधु तिर्की नहीं हैं जिनकी विधायकी सजा सुनाने के बाद खत्म हुई हो, इससे पहले भी 5 विधायक ऐसे हैं, जिनकी विधायकी कोर्ट की तरफ से सजा सुनाने के बाद खत्म हो गयी है। इन विधायकों में झामुमो के राजधनवार विधायक निजामुद्दीन अंसारी, झारखंड पार्टी के कोलेबिरा विधायक एनोस एक्का, लोहरदगा के आजसू विधायक कमल किशोर भगत, गोमिया के झामुमो विधायक योगेंद्र प्रसाद व सिल्ली के झामुमो विधायक अमित महतो के नाम शामिल हैं।

बदलेगा राजनीतिक समीकरण

बंधु तिर्की 2019 में झाविमो के टिकट से जीतकर विधायक बने थे। 2020 में वह अपने साथी प्रदीप यादव के साथ कांग्रेस में शामिल हो गये। लेकिन उन्हें विधानसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस के सदस्य की मान्यता नहीं दी। लेकिन कांग्रेस पार्टी ने उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया। इस बीच उनके खिलाफ दल-बदल का मामला विधानसभा अध्यक्ष के न्यायाधिकरण में दायर किया गया। यह मामला अभी चल रहा था। लेकिन उनकी सदस्यता जाने के बाद यह मामला अप्रांसगिक हो गया है। कांग्रेस उनके साथ प्रदीप यादव को अपना सदस्य मानकर चल रही थी। लिहाजा उनके सदस्यों की संख्या 18 से घटकर 17 हो जायेगी।

झारखंड विस के सदस्य जिनकी गयी सदस्यता

● कमल किशोर भगत (आजसू), मांडर

● एनोस एक्का (झारखंड पार्टी), कोलेबिरा

● योगेंद्र प्रसाद (झारखंड मुक्ति मोर्चा), गोमिया

● अमित महतो (झारखंड मुक्ति मोर्चा), सिल्ली

● निजामुद्दीन अंसारी (झामुमो), राजधनवार

पारा टीचर की हत्या मामले में एनोस को हुई थी उम्रकैद

कमल किशोर भगत की विधायकी जून 2015 में खत्म हुई, जब कोर्ट की तरफ से उन्हें 21 साल पुराने मामले में सात साल की सजा सुनायी थी। डॉ. केके सिन्हा पर हमला करने, मारपीट करने और रंगदारी मांगने के मामले में विधायक पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। कोलेबिरा के विधायक एनोस एक्का को 2018 में पारा टीचर मनोज कुमार की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनायी गयी थी।

एनोस एक्का को धारा 302 और 120 बी में उम्रकैद और एक लाख रुपये जुर्माना लगाया गया था। सिल्ली से विधायक अमित महतो को अंचलाधिकारी के साथ मारपीट करने के मामले में दो साल सश्रम कारावास की सजा और 45 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। सजा सुनाये जाने के बाद ही अमित महतो की विधायकी चली गयी थी। रामगढ़ जिले में कोयला चोरी मामले में गोमिया से झामुमो विधायक योगेंद्र प्रसाद को पांच साल की सजा मिली थी। उनके साथ चार और लोगों को यही सजा मिली थी। साथ में पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था। झामुमो के विधायक निजामुद्दीन अंसारी के खिलाफ गिरिडीह की एक अदालत ने दो साल से ज्यादा सजा सुनायी थी। सजा सुनाने के बाद ही सदस्यता खत्म हो गयी।