रांची।देवघर में त्रिकुट पर्वत रोपवे हादसे को झारखंड हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है।मंगलवार को चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन और जस्टिस एसएन प्रसाद की खंडपीठ ने मामले में संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है।अदालत ने कहा कि कुछ अखबारों में वर्ष 2009 में तकनीकी गड़बड़ी होने की बात कही गई है। इसके बाद भी सबक नहीं लिया गया और दोबारा घटना हो गई है। इस मामले की अगली सुनवाई 25 अप्रैल को होगी।
मंगलवार को सुबह सुनवाई के दौरान अदालत ने मीडिया रिपोर्ट के आधार पर देवघर में हुए हादसे के बारे में महाधिवक्ता से जानकारी ली। महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि राहत एवं बचाव कार्य अंतिम चरण में है। इस पर अदालत ने अखबारों में छपी खबर का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2009 में रोपवे की जांच में तकनीकी खामियां पाई गई थी।इसके बावजूद संबंधित विभाग की ओर से रोपवे चलाने की अनुमति दी गई। ऐसा करना बहुत की गंभीर मामला है।
अदालत ने कहा कि इसकी जांच होनी चाहिए कि आखिर किन परिस्थितियों में रोपवे के परिचालन को लेकर एनओसी प्रदान की गई है। सरकार की ओर से बताया कि जांच के लिए उच्चस्तरीय कमेटी गठित की गई है। कमेटी इसकी जांच में जुट गई है। इस पर अदालत ने जांच रिपोर्ट अदालत में पेश करने का निर्देश दिया। बता दें कि अखबारों में प्रकाशित दुर्घटना से संबंधित खबरों को गंभीरता से लेते हुए झारखंड हाइकोर्ट ने उसे जनहित याचिका में तब्दील कर दिया।




