धनबाद।नसबंदी में गड़बड़ी होने की वजह से पिता बने निरसा के अशोक पासवान की जीत हुई।स्वास्थ्य विभाग ने नसबंदी को असफल माना और ये भी माना कि इस गड़बड़ी की वजह से अशोक पासवान को तीसरा बच्चा हुआ। स्वास्थ्य विभाग को इस गड़बड़ी के लिए क्षतिपूर्ति के रूप में 30 हजार रुपए हर्जाना भरना पड़ा है। शनिवार को ये रकम अशोक पासवान को दी गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार अशोक पासवान के दो बच्चे थे और इनका परिवार पूरा हो चुका था। मार्च 2020 में अशोक ने निरसा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नसबंदी कराई थी।नसबंदी के बाद अशोक दोबारा फिर पिता बन गए।अशोक ने इसकी शिकायत जिले से लेकर राज्यस्तर तक के अधिकारियों तक की। करीब डेढ़ साल तक अशोक को पूरे महकमे से संघर्ष करना पड़ा।

इस मामले की जांच के लिए मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम बनाई गई थी।अशोक की नसबंदी के कागजात निरसा से मंगवाए गए और कई बार उसकी जांच हुई और जांच में आवेदक का दावा सही पाया गया। मेडिकल कॉलेज की मेडिकल टीम ने नसबंदी को असफल माना। इसके बाद अशोक को स्वास्थ्य विभाग द्वारा मुआवजे की राशि प्रदान की गई।

इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के जानकारों का कहना है कि नसबंदी के दौरान कभी-कभी गड़बड़ी होती है और ये सफल नहीं हो पाती। इसके कारण नसबंदी के बाद भी व्यक्ति पिता बन जाता है और अशोक के मामले में भी यही हुआ है। सिविज सर्जन डॉ श्याम किशोर कांत के अनुसार इस मामले की व्यापक जांच कराई गई थी। जांच में आवेदक का दावा सही पाया गया। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर पीड़ित को बतौर मुआवजा 30 हजार रुपया प्रदान किया गया है।