वाराणसी। आध्यात्मिक नगरी काशी में चैत्र नवरात्रि के पंचमी से सप्तमी तक चलने वाले श्री श्री 1008 बाबा महाश्मसान नाथ जी का तीन दिवसीय श्रृंगार महोत्सव का शुभारम्भ 6 अप्रैल को होगा और 8 अप्रैल तक चलेगा। महोत्सव में प्रत्येक वर्ष की तरह रुद्राभिषेक, भोग-आरती व भव्य भंडारे का आयोजन किया जाएगा। आठ अप्रैल को महोत्सव के अंतिम दिन नगर वधुओं द्वारा महाश्मसान नाथ जी को भावांजलि प्रस्तुत की जाती हैं,जो कि रात्रि पर्यंत तक चलती रहती है। हर साल किया जाता है बाबा महाश्मशान नाथ का श्रृंगार ऐसी मान्यता है कि चैत्र नवरात्रि में रुठे हुए बाबा भोले नाथ को मनाने के लिए शक्ति स्वयं मशान पर आती हैं।मणिकर्णिका घाट पर बाबा महाश्मशान नाथ जी का श्रृंगार महोत्सव हर वर्ष किया जाता है।इस वर्ष के महोत्सव को लेकर आयोजन समिति के अध्यक्ष चैनू प्रसाद गुप्ता ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए बताया कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी 6 अप्रैल को बाबा का वैदिक परम्परा से रुद्राभिषेक व भव्य पूजन होगा और 7 अप्रैल को भोग आरती के बाद भंडारा व सायंकाल भजन कीर्तन होगा। सैकड़ों साल से चली आ रही परंपरा आठ अप्रैल को सायंकाल 6 बजे से बाबा का तांत्रोक्त विधि से पूजन पंचमकार का भोग व नगर वधुओं द्वारा नित्यांजली रात्रि पर्यन्त होगा।श्रृंगार महोत्सव के प्रारंभ के बारे में विस्तार से बताते हुए आयोजन समिति के गुलशन कपूर ने कहा कि यह परम्परा सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है, जिसमें यह कहा जाता है कि राजा मानसिंह द्वारा जब बाबा के इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया था, तब मंदिर में संगीत के लिए कोई भी कलाकार आने को तैयार नहीं हुआ था।इसी कार्य को पूर्ण करने के लिए जब कोई तैयार नहीं हुआ तो राजा मानसिंह काफी दुःखी हुए और यह संदेश धीरे-धीरे पूरे नगर में फैलते हुए काशी के नगर वधुओं तक भी पहुंचा।नगर वधुओं ने डरते हुए अपना संदेश राजा मानसिंह तक भिजवाया कि यह मौका अगर उन्हें मिलता हैं तो काशी की सभी नगर वधुएं अपने आराध्य संगीत के जनक नटराज महाश्मसानेश्वर को अपनी भावाजंली प्रस्तुत कर सकती है।यह संदेश पाकर राजा मानसिंह काफी प्रसन्न हुए और ससम्मान नगर वधुओं को आमंत्रित किया और तब से यह परम्परा चल निकली। नगर वधुओं के मन में यह आया कि अगर वह इस परम्परा को निरन्तर बढ़ाती हैं तो उनके इस नरकीय जीवन से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होगा।फिर क्या था आज सैकड़ों वर्ष बीतने के बाद भी यह परम्परा जीवित है और बिना बुलाये यह नगर वधुएं कहीं भी रहें, चैत्र नवरात्रि की सप्तमी तिथि को ये आध्यात्मिक नगरी काशी के मणिकर्णिका घाट पर खुद आ जाती है।
बाबा महाश्मशान नाथ जी का तीन दिवसीय श्रृंगार महोत्सव छह अप्रैल से, अंतिम दिन नगर वधुएं देंगी प्रस्तुति
बाबा महाश्मशान नाथ जी का तीन दिवसीय श्रृंगार महोत्सव छह अप्रैल से,अंतिम दिन नगर वधुएं देंगी प्रस्तुति <Br/> <Br/>
sanjay kumar📍 अन्य, उत्तर प्रदेश
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