भगवा खेमे में भगदड़ मचा के अखिलेश के हौसले बुलंद, लेकिन इतनी भी आसान नहीं डगर
भगवा खेमे में भगदड़ मचा के अखिलेश के हौसले बुलंद,लेकिन इतनी भी आसान नहीं डगर <Br/> <Br/>
sanjay kumar📍 लखनऊ, उत्तर प्रदेश

लखनऊ।देश के चार राज्यों में भी 2022 विधानसभा चुनाव है लेकिन देशभर में सबकी निगाहें उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव पर टिक गई है।नज़रें टिके क्यों न भी क्यों कि यहां का चुनाव दिलचस्प होता जा रहा है।भारतीय जनता पार्टी के कई विधायकों और मंत्रियों के समाजवादी पार्टी में शामिल होने के कुछ ही दिन में उत्तर प्रदेश की चुनावी तस्वीर बिल्कुल बदल गई है।
भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश में पहले बड़ी आसानी के साथ राजधानी लखनऊ के सिंहासन की ओर बढ़ती हुई नजर आ रही थी,लेकिन भाजपा की राह में अपनों ने ही गढ्ढे खोद डाले हैं। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले समाजवादी पार्टी ने भगवा के खेमे में जबरदस्त डामाडोल किया है।चुनाव के तारीख की घोषणा होते ही एक के बाद एक भगवा खेमे के कई मंत्री और विधायक समाजवादी पार्टी की तरफ रुख कर लिया है। समाजवादी पार्टी के मुखिया व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव गदगद हो गए हैं। चुनावी पिच पर उन्होंने विस्फोटक बल्लेबाजी करते हुए करारा झटका दिया है।उन्होंने कहा कि अगर भाजपा को इसकी जरा भी भनक लगती तो वह डैमेज कंट्रोल में लग जाती और सपा मुखिया इस बात लेकर इतने खुश हैं कि उनकी रणनीति को भाजपा जान नहीं पायी।
उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ दिनों में समाजवादी पार्टी चुनावी शो में छा गई है।बीते तीन दिनों में भारतीय जनता पार्टी के कम से कम 9 विधायकों ने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है और ये संख्या लगातार बढ़ रही है। अक्टूबर से भारतीय जनता पार्टी के लगभग 13 विधायक समाजवादी पार्टी में शामिल हो चुके हैं। 11 तारीख से भगवा खेमे के बागी विधायकों का समाजवादी पार्टी में शामिल होने की खबरें सुर्खियों में छाई हुई हैं,और तो और ये पूरा काम गाजे-बाजे के साथ हुआ।सभी ने अपने इस्तीफे में कमोबेश एक ही जैसी बातें लिखी है,मीडिया में आकर सभी ने एक ही बातें दोहराई है।इस्तीफा देने वाले लगभग हर विधायक और मंत्री के साथ सपा मुखिया ने अपनी तस्वीर सांझा की।
भगवा खेमा छोड़ने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य, धर्म सिंह सैनी, भगवती सागर, विनय शाक्य, रोशन लाल वर्मा, मुकेश वर्मा, बृजेश कुमार प्रजापति को शुक्रवार को बड़ी धूमधाम से समाजवादी पार्टी में शामिल किया गया।इसे एक खास आयोजन का रुप दिया गया।इस खास आयोजन में सपा मुखिया अखिलेश यादव भी मौजूद रहे। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इतने विधायकों का भगवा को छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल होना सपा मुखिया के लिए चुनावी पिच पर विश्वकप जीतने से कम नहीं हैं और अब तो भाषा,तेवर और चेहरे की चमक बदल गई है।
सपा मुखिया ने विधायकों के समाजवादी पार्टी में शामिल होने के इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तंज कसते हुए कहा कि मुझे लगता है कि सरकार के लोगों को पहले ही पता लग गया था कि स्वामी प्रसाद मौर्य और धर्म सिंह सैनी के साथ बड़ी संख्या में लोग आ रहे होंगे। इसलिए हमारे मुख्यमंत्री पहले ही गोरखपुर चले गए, लेकिन उनकी 11 मार्च की किसी ने टिकट बुक कर रखी है।
सपा मुखिया ने कहा कि ये जो उत्तर प्रदेश के बाबा मुख्यमंत्री हैं वो फेल हो चुके हैं। जितने भी दिल्ली वाले आए अब ये पास होने वाले नहीं हैं, क्योंकि जनता ने मन बना लिया है कि इनका सूपड़ा साफ होगा।इस बार तो ऐसा भाजपा वाले हिट विकेट हुए कि हमारे तमाम नेताओं की स्ट्रैटेजी नहीं समझ पाए,अगर वो स्ट्रैटिजी समझ गए होते तो पता नहीं क्या करते,न जाने कौन से डैमेज कंट्रोल में लग जाते।
सपा मुखिया ने कहा कि 80 बनाम 20 से उनका मतलब है कि भाजपा को उत्तर प्रदेश चुनाव में 20 फीसदी सीटें मिलेंगी,जबकि बाकी 80 फीसदी सपा को मिलेंगी, लेकिन आज की भीड़ देखकर लगता है कि अब उनको वह भी मिलना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि कुछ दिनों पहले हमने कहा था कि मुख्यमंत्री जी को गणित का अध्यापक रखना होगा। यह जो अस्सी और बीस की बात कर रहे हैं समाजवादी पार्टी के साथ अस्सी फीसदी लोग खड़े ही हो गए। जिन जिन लोगों ने आज मंच को देखा होगा, स्वामी प्रसाद मौर्य की बात सुनी होगी, उससे लगता है कि वह 20 फीसदी भी उनके खिलाफ हो गए होंगे। अब भाजपा का सफाया होना तय है,अब कोई सफाया होने से रोक नहीं सकता और जो लोग तीन चौथाई की बात कर रहे थे। वो दरअसल तीन से चार फीसदी की बात कर रहे हैं।
भाजपा सपा का प्लान समझने में चूकी
भारतीय जनता पार्टी को एक के बाद एक इतने विधायकों और मंत्रियों का छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल होना बड़ी बात है।ये सब अचानक से कैसे हो गया,बगावत के खिलाफ भाजपा समय रहते कुछ क्यों नहीं कर पाई,क्या सपा का प्लान समझने में भाजपा से चूक हुई।
ये बात तो तय है कि स्वामी प्रसाद मौर्य के भाजपा छोड़ने के बाद बाकी पिछड़े नेता यूं ही नहीं छोड़ने लगे,सबका आपस में तालमेल पहले ही सेट हो गया होगा और तालमेल को सेट करवाने वाले सपा मुखिया रहे होंगे। भाजपा को इतनी बड़ी तालमेल सेटिंग की भनक तक क्यों नहीं लगी।पिछले तीन दिनों में जो कुछ हुआ उससे प्रतीत होता है कि ये सोची-समझी रणनीति है। सपा मुखिया ने इसके जरिए चुनावी आकर्षण छीन लिया है। पिछले कुछ दिनों में बस उसी की चर्चा है कि भाजपा को इस मोर्चे पर सपा मुखिया ने धोबिया पछाड़ दांव लगाकर पटका है।
अखिलेश की डगर आसान नहीं
अभी तक इस्तीफा देने वाले मंत्री और विधायक भाजपा छोड़कर आए हैं,वो सभी स्वामी के बेहद खास माने जाते हैं।मंगलवार को यूपी सरकार से स्वामी के इस्तीफे के बाद ये सभी विधायक भाजपा छोड़कर सपा में शामिल हुए हैं।इनमें से अधिकतर विधायक 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले बसपा से भाजपा में शामिल हुए थे। भाजपा के कुछ नेता दावा कर रहे है कि ये वो विधायक हैं जो जानते हैं कि इस बार उन्हें विधानसभा का टिकट नहीं दिया जाएगा।
सपा मुखिया अखिलेश यादव आज भले ही गदगद हैं, लेकिन उनके सामने इन सभी को साधना की बड़ी चुनौती है। ये ऐसा ग्रुप है जो सिर्फ सत्ता की बहती हुई हवा देखता है,किसी की परवाह नहीं करता है,जो पांच साल सत्ता का मजा लेने के बाद भाजपा को बाय बाय कर सकता है वो सपा के साथ दगाबाजी नहीं करेगा,इसकी गारंटी कैसे दी जा सकती है।
वैसे भी ये नेता इस लिए सपा के साथ गए क्योंकि इनको प्रतीत हो रहा है कि भाजपा जाति पर आधारित राजनीति की जड़ खतम करने पर जुटी है।ये सभी अपनी-अपनी जाति की ही राजनीति करते हैं और भाजपा से शायद खतरा लग रहा था। संभवतः सपा मुखिया को इनकी सौदेबाजी का सामना करना पड़ा सकता है और इनके साथ सौदे की शर्तें बहुत कठिन हो सकती हैं।सपा मुखिया को इसके लिए तैयार रहना होगा।
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