मुख्तार अंसारी की मुसीबत तो बढ़ी ही,सपा-सुभासपा के खेमे में भी मचा हड़कंप
मुख्तार अंसारी की मुसीबत तो बढ़ी ही,सपा-सुभासपा के खेमे में भी मचा हड़कंप <Br/> <Br/> <Br/> <Br/>
sanjay kumar📍 लखनऊ, उत्तर प्रदेश

लखनऊ।उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का पहला चरण पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 11 जिलों की 58 विधानसभाओं में कल संपन्न हो गया।अब इन 58 विधानसभा के प्रत्याशियों को दस मार्च को आने चुनाव परिणाम का इंतजार है।इसी बीच पूर्वांचल के मऊ जिले की सदर विधानसभा सीट पर जबरदस्त हलचल बढ़ी हुई है।केवल हलचल ही नहीं बढ़ी है, बल्कि कुछ ऐसा हुआ है कि सपा-सुभासपा खेमे में हड़कंप मचा हुआ है।मऊ सदर व से समाजवादी पार्टी के सहयोगी ओम प्रकाश राजभर की पार्टी सुभासपा के टिकट पर जेल में बंद बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी चुनाव लड़ेंगे,लेकिन सपा के नेता ने ही बाहुबली की मुसीबतों को बढ़ा दिया है। 2017 के विधानसभा चुनाव में मुख्तार अंसारी के सामने सपा प्रत्याशी रहे अल्ताफ अंसारी ने निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे।
मऊ में सातवें चरण में मतदान होगा।जिले की सभी विधानसभा सीटों पर कुल 45 पर्चे खरीदे गए। जितने लोगों ने पर्चा खरीदा है।इनमें सबसे ज्यादा चर्चा अल्ताफ अंसारी और बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी की ही है।एक ओर जहां अल्ताफ अंसारी ने अपने प्रतिनिधि रामधनी चौहान के माध्यम से पर्चा लिया है तो वहीं सदर विधानसभा में सपा गठबंधन के हिस्सेदार सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के बैनर तले मुख्तार अंसारी ने अपने वकील दरोगा सिंह के माध्यम से 2 सीटों पर पर्चा खरीदा है। मुख्तार अंसारी ने अदालत से नामांकन प्रक्रिया के लिए इजाजत भी ले ली है।
जिस विधानसभा में सपा-सुभासपा के संयुक्त प्रत्याशी मुख्तार अंसारी ताल ठोकने वाले हैं, उसी विधानसभा से सपा नेता अल्ताफ अंसारी ने पर्चा खरीद कर सियासी पारे को बढ़ा दिया है।अल्ताफ अंसारी द्वारा पर्चा खरीदे जाने के बाद राजनीतिक गलियारे में जबरदस्त हलचल बढ़ गई है। 2017 के विधानसभा चुनाव में अल्ताफ अंसारी मुख्तार अंसारी से मात्र कुछ ही वोटों से चुनाव हारे थे।
मऊ सदर विधानसभा से सपा के पूर्व प्रत्याशी अल्ताफ के नाम पर पर्चा लिए जाने के बाद पूरा समीकरण बदल गया है, और इससे लगने लगा है कि मुख्तार अंसारी को लेकर समाजवादी पार्टी और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी में कुछ न कुछ जरूर खींचतान है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन की औपचारिकताओं को पूरी करने के लिए मुख्तार अंसारी के अधिवक्ता, प्रस्तावकों, नोटरी अधिवक्ता एवं फोटोग्राफरों को बांदा जेल में जाने की अनुमति मिल गई है। ऐसे में अल्ताफ की दावेदारी मुख्तार अंसारी के लिए मुसीबत बन सकती है।अब देखना होगा कि समाजवादी पार्टी अपने इस बागी नेता को किस तरह से समझाने में कामयाब होगी।
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