लखनऊ।उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के चुनावी दंगल की तैयारियों के बीच जनता दल की निगाहें पटेल समुदाय पर टिक गयी हैं। जेडीयू 10 फरवरी से होने वाले चुनावी दंगल में 50 सीटों पर दंगल लड़ने के लिए अपनी मशीनरी को तैयार कर रही है। मंगलवार को पार्टी द्वारा 20 प्रत्याशियों की पहली लिस्ट जारी की। इनमें अधिकतर सीटें पूर्वांचल की हैं जहां पटेल समुदाय की मौजूदगी है।शुक्रवार जेडीयू ने अपने स्टार प्रचारकों को अंतिम रूप दिया था। जेडीयू के नेताओं की माने तो पार्टी का फोकस पूर्वांचल के अलावा अवध क्षेत्र या मध्य यूपी पर है।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्य में एक वर्चुअल रैली को संबोधित करेंगे, लेकिन रैली की अभी तारीख निर्धारित नहीं है। इसके अलावा, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह,राष्ट्रीय प्रवक्ता और महासचिव केसी त्यागी, वरिष्ठ नेता हर्षवर्धन सिंह और उपेंद्र कुशवाहा यूपी चुनाव के लिए पार्टी के 15 स्टार प्रचारकों में शामिल हैं।

जेडीयू यूपी प्रमुख अनूप सिंह पटेल ने कहा कि पार्टी राज्य में और सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला कर सकती है। अब तक घोषित उम्मीदवार यूपी में पार्टी के कार्यकर्ता और पदाधिकारी हैं।पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि हम अगले हफ्ते और उम्मीदवारों के नाम लेकर आएंगे।अयोध्या, लखनऊ, कानपुर देहात, प्रयागराज, मिर्जापुर, जौनपुर, देवरिया, सोनभद्र, उन्नाव, बलिया, वाराणसी, सिद्धार्थनगर, रामपुर, अमेठी, श्रावस्ती, प्रतापगढ़ और ललितपुर विधानसभा सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा कर दी गई है। यूपी चुनावों के लिए भाजपा के पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करने के बाद उसने अकेले जाने का फैसला किया।

हालांकि यह पहली बार नहीं है जब जेडीयू यूपी विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी। 2012 में पार्टी ने अकेले चुनाव लड़ा और साथ ही अब तक अधिकतम 218 सीटों पर चुनाव लड़ा। लेकिन पार्टी को कोई सीट नहीं मिली। ये यूपी में 2002 और 2007 के विधानसभा चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन के विपरीत था।जब जेडीयू ने भाजपा के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा और एक सीट जीती। हालांकि पार्टी ने 2017 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा।


जेडीयू ने यूपी में शासन का बिहार मॉडल स्थापित करने के लिए चुनाव लड़ेगी, जो न्याय के साथ विकास के बारे में है। जेडीयू ने यूपी चुनाव के लिए भी मुद्दों को सूचीबद्ध किया है। जेडीयू ने एमएसपी को वैध बनाने के अलावा सेज नीति के तहत पूर्वांचल के विकास के लिए विशेष दर्जा देने की भी मांग की है। पार्टी ने यह भी कहा है कि यूपी सरकार को चुनावी दौर में ही किसानों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने चाहिए।