राज्य में विकास योजनाओं को शतप्रतिशत धरातल पर उतारने की दिशा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का प्रयास सराहनीय है। मुख्यमंत्री द्वारा सूबे के विभिन्न विभागों की समीक्षा करते हुए योजनाओं को अमलीजामा पहनाने और उसका लाभ सीधे तौर पर जनता को पहुंचाने के लिए राज्य के उच्चाधिकारियों को निर्देशित किया जाना यह दर्शाता है कि विकास कार्यों के साथ कोई कोताही नहीं बरती जाएगी। शिक्षा,स्वास्थ्य, पेयजलापूर्ति,सड़क, पर्यावरण संरक्षण, युवाओं को रोजगार, महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने सहित कई ऐसे कार्यों को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गति दी है, जिससे जनता लाभान्वित हो रही है। कई कल्याणकारी योजनाएं मील का पत्थर साबित हुई है।ग्रामीण क्षेत्रों से रोजगार की तलाश में मजदूरों के पलायन पर रोक लगाने की दिशा में भी मुख्यमंत्री ने क्रांतिकारी कदम उठाया है। निजी क्षेत्र के उद्यमों में स्थानीय युवकों को 75 फीसदी रोजगार मुहैया कराने का कड़ाई से अनुपालन करने का मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है। इसका असर भी दिखने लगा है। राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के लिए मनरेगा के तहत विभिन्न प्रकार की योजनाएं संचालित कर रही है। हर पंचायत में कम से कम पांच योजनाओं का संचालन किया जाना है। इसे प्राथमिकता के साथ लागू करने का निर्देश मुख्यमंत्री ने दिया है। इससे मजदूरों को अपने गांव घर में ही रोजगार संभव हो सका है।
मुख्यमंत्री का मानना है कि काम की तलाश में राज्य से बाहर जाने वाले मजदूरों को विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उन्हें अपने घर में ही रोजगार मिले, तो पलायन रुकेगा।जनहित में बनी योजनाओं का पूरा लाभ लोगों को मिले, इसके लिए मुख्यमंत्री ने गत दिनों विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को जो निर्देश दिए हैं। इसका निश्चित तौर पर असर दिखेगा और निसंदेह इससे राज्य की जनता का भला होगा। यही नहीं मुख्यमंत्री की इस पहल का सकारात्मक प्रभाव राज्य की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। इससे अर्थव्यवस्था में भी आशातीत सुधार संभव है।बहरहाल मुख्यमंत्री ने राज्य के ब्यूरोक्रेट्स के साथ संवाद कर समीक्षा बैठक में यह संकेत दे दिया है कि जनहित में बनाई गई कल्याणकारी योजनाओं, विकास कार्यों में कोताही बरतने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा।यह राज्य की जनता के प्रति मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की प्रतिबद्धता का परिचायक है।
गौरतलब है कि आगामी वर्ष लोकसभा चुनाव होने हैं। इसके मद्देनजर आदर्श आचार संहिता लग जाने के बाद विकास कार्यों पर भी ब्रेक लग जाता है। ऐसे में राज्य के आलाधिकारियों के साथ विभिन्न विभागों की समीक्षा कर ससमय योजनाओं को पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री का निर्देश उनकी दूरदर्शिता का भी परिचायक है।





