शुभांगी राज ने लहराया सफलता का परचम,नीट यूजी-2023 में ऑल इंडिया रैंकिंग में प्राप्त किया 1232वां स्थान
डॉक्टर बनकर करेंगी देशसेवा,कड़ी मेहनत से मिली सफलता : शुभांगी राज
रांची। लक्ष्य हासिल करने का जज्बा और जुनून हो तो सफलता का मार्ग खुद ब खुद प्रशस्त हो जाता है। मंजिल तक पहुंचने में कामयाबी हासिल होती है। इसे सच साबित कर दिखाया है हरमू आवासीय कॉलोनी के आवास संख्या एचआई-58 निवासी राजीव कुमार और मंजुला सिंह की सुपुत्री शुभांगी राज ने। शुभांगी ने नीट (यूजी)-2023 की परीक्षा में ऑल इंडिया रैंकिंग के तहत 1232वां स्थान प्राप्त किया है।शुभांगी की इस सफलता पर उनके परिजन, रिश्तेदार, शुभचिंतक, सहपाठी गौरवान्वित हैं। उसने रांची शहर के साथ-साथ पूरे झारखंड का नाम रोशन किया है।
बचपन से ही पढ़ाई में रही अव्वल
शुभांगी बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रही है।उसने कक्षा एक से लेकर 10वीं तक हरमू स्थित संत फ्रांसिस स्कूल से शिक्षा ग्रहण की। वहां से दसवीं पास करने के बाद ख्याति प्राप्त एवं प्रतिष्ठित स्कूल जेवीएम श्यामली से उसने प्लस टू की परीक्षा अच्छे अंकों से पास की। इस दौरान आकाश इंस्टिट्यूट से नीट की परीक्षा में शामिल होने के लिए कोचिंग क्लास भी करती रही। प्रतिभावान शुभांगी को आकाश इंस्टीट्यूट की ओर से स्कॉलरशिप भी प्राप्त हुई। वह बताती है कि प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी में उनके माता-पिता, आकाश इंस्टिट्यूट के अनुभवी एवं कुशल मार्गदर्शक टीचर्स सहित उनके साथ सहपाठियों का भी योगदान रहा।
चिकित्सक बनकर करना चाहती हैं देश सेवा
शुभांगी नीट यूजी 2023 प्रतियोगिता परीक्षा में सफल होने के बाद मेडिकल के क्षेत्र में अपना कैरियर संवारना चाहती है।वह एक कुशल डॉक्टर बनकर देश सेवा करने के प्रति इच्छुक है। शुभांगी कहती हैं कि डॉक्टर को भगवान का दूसरा रूप माना जाता है।जटिल व असाध्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों का इलाज कर मनुष्य को पुनर्जीवन देने की दिशा में डॉक्टर प्रयासरत रहते हैं। यह सबसे बड़ी और सच्ची मानव सेवा है। इसलिए देशवासियों को बेहतर चिकित्सा के माध्यम से स्वस्थ रखने के उद्देश्य को लेकर जीवन पथ पर अग्रसर रहने का निर्णय लिया है।
मेहनत से मिला मुकाम
शुभांगी ने बातचीत के क्रम में बताया कि कड़ी मेहनत से यह सफलता मिली है। लगन और परिश्रम से हर मुकाम हासिल किया जा सकता है। इसके साथ ही कुशल व अनुभवी पथ-प्रदर्शक/शिक्षक का दिशा-निर्देश भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। शुभांगी ने अपनी सफलता का श्रेय आकाश इंस्टिट्यूट के शिक्षकों के अलावा अपने अभिभावक, चाची रेणु सिंह, चाचा अरविंद सिंह सहित अन्य परिजनों को भी दिया, जिनके उत्साहवर्धन से वह प्रतियोगिता में सफल हुई।





