लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चुनावी दंगल का बिगुल बज चुका है।हर रोज कोई नेता चुनावी पाला बदल एक्सप्रेस पर सवार हो रहा है,लेकिन अधिक सुर्खियां कुछ दिन पहले ही योगी मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने वाले पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य बटोर रहे हैं।
स्वामी के इस्तीफे के बाद से अटकले तेज हो गई थी कि वे समाजवादी पार्टी का दामन थामेंगे,मगर स्वामी ने इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की थी और कहा था कि शुक्रवार को सब स्पष्ट हो जाएगा।

मकर संक्राति के दिन स्वामी समाजवादी पार्टी के मुखिया व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ एक मंच पर नजर आए।एक मंच पर हुंकार भरते हुए स्वामी के साथ शक्ति प्रदर्शन कर रहे सपा मुखिया की मुश्किलें बढ़ गई हैं। राजधानी के सपा मुख्‍यालय पर सदस्यता समारोह में उमड़ी हजारों कार्यकर्ताओं की भीड़ पर चुनाव आयोग ने संज्ञान ले लिया है और केस दर्ज किया है।चुनाव आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारी डीएम को जांच के आदेश दिए।इसके बाद लखनऊ डीएम अभिषेक प्रकाश ने एक टीम भेजकर वीडियोग्राफी कराई।

डीएम अभिषेक का कहना था कि समाजवादी पार्टी का कार्यक्रम बिना अनुमति के किया गया।सूचना मिलने पर मजिस्ट्रेट के साथ पुलिस टीम को सपा दफ्तर भेजा गया और इसके बाद कार्यक्रम पर एफआईआर दर्ज की गई। गौतमपल्ली थाने में धारा 144 का उल्लंघन और महामारी एक्ट के तहत पुलिस ने ये एफआईआर दर्ज की है।

आपको बताते चलें कि कोरोना की तीसरी लहर के बीच हो रहा उत्तर प्रदेश 2022 विधानसभा के चुनाव में कोरोना संक्रमण के रोकथाम के लिए चुनाव आयोग ने पहले ही कहा था कि कोई फिजिकल रैली नहीं करेगा। इसके बाद भी सपा कार्यालय पर सदस्यता समारोह में हजारों कार्यकर्ताओं की भीड़ इकट्ठा हो गई। स्‍वामी प्रसाद मौर्य, धर्म सिंह सैनी समेत 6 विधायकों ने शुक्रवार को आधिकारिक तौर पर सपा में शामिल हो गए हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा ने हाल ही में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब सहित पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा करते हुए साफ कर दिया था कि किसी भी राज्य में रैली और रोड शो के आयोजन की इजाजत नहीं होगी।इसके अलावा किसी नुक्कड़ सभा का आयोजन भी सार्वजनिक स्थानों पर नहीं होगा।साइकिल रैली,बाइक रैली और पदयात्रा जैसी चीजों पर भी रोक रहेगी,रात 8 बजे के बाद चुनाव प्रचार पर रोक रहेगी,चुनाव आयोग ने चुनावी पार्टियों से कहा था कि वो अधिक से अधिक वर्चुअल रैली या डिजीटल रैली पर जोर दें।ये सभी पाबंदियां 15 जनवरी तक लागू हुई थीं।

चुनाव आयोग ने साफ किया था कि 15 जनवरी के बाद इसकी समीक्षा की जाएगी और फिर आगे इस पर फैसला लिया जाएगा,लेकिन अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की गाइडलाइन का उल्लंघन किया और हजारों कार्यकर्ताओं का हुजूम इकट्ठा कर कोरोना को खुला निमंत्रण दिया है।

आपको बता दें कि चुनाव आयोग ने तो यहां तक कहा था कि डोर टू डोर कैंपेन में भी पांच से अधिक लोग नहीं जा सकते हैं,लेकिन फिर भी शुक्रवार को जब सपा मुख्‍यालय पर नेताओं के हजारों समर्थकों-कार्यकर्ताओं की भीड़ इकट्ठा हुई तो ये सारी पाबंदियां और कोरोना गाइडलाइन की धज्जियां हवा में उड़ती हुई नजर आईं।