नई दिल्ली: आज जिस 5G इंटरनेट, हाई-स्पीड वीडियो स्ट्रीमिंग और इंस्टेंट वीडियो कॉलिंग का आनंद हम आसानी से ले रहे हैं, उसकी नींव आज से करीब साढ़े चार दशक पहले रखी गई थी। दुनिया के पहले कमर्शियल सेलुलर मोबाइल नेटवर्क की शुरुआत साल 1979 में जापान की राजधानी टोक्यो से हुई थी।
1G: सेलुलर सिस्टम की शुरुआत जापानी टेलीकॉम कंपनी NTT ने 1979 में पहली जनरेशन (1G) का नेटवर्क लॉन्च किया था।
- उपयोग: यह मुख्य रूप से कारों में फिट किए गए फोन्स के लिए इस्तेमाल होता था और केवल वॉयस कॉल्स तक सीमित था।
- टेक्नोलॉजी: इसमें पूरे शहर को छोटे-छोटे रेडियो एरियाज यानी 'सेल्स' में बांटा गया था। हर सेल का अपना बेस स्टेशन होता था।
- खासियत: एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में जाने पर कॉल बिना कटे अगले सेल से अपने आप कनेक्ट हो जाती थी। यही सिस्टम आधुनिक मोबाइल नेटवर्क्स की बुनियाद बना।
2G से 5G तक का विकास 1G के बाद मोबाइल नेटवर्क टेक्नोलॉजी में लगातार क्रांतिकारी बदलाव आए:
- 2G: डिजिटल कम्युनिकेशन की शुरुआत हुई और पहली बार SMS (मैसेजिंग) की सुविधा मिली।
- 3G: मोबाइल डेटा और बेसिक इंटरनेट/वीडियो सर्विसेज आम लोगों तक पहुंचीं।
- 4G: हाई-स्पीड इंटरनेट के दौर की शुरुआत हुई, जिसने ऐप इकोनॉमी और एचडी वीडियो स्ट्रीमिंग को सुलभ बनाया।
- 5G: आज 5G के जरिए रियल-टाइम कनेक्टिविटी, सीमलेस ऑनलाइन गेमिंग और सुपरफास्ट डेटा ट्रांसफर मुमकिन हो चुका है।
जापानी टेलीकॉम कंपनी NTT (Nippon Telegraph and Telephone) ने 1979 में दुनिया का पहला कमर्शियल सेलुलर नेटवर्क टोक्यो में पेश किया था।
1G की सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति इसका 'सेलुलर सिस्टम' था। इसके तहत पूरे शहर को छोटे-छोटे रेडियो क्षेत्रों (Cells) में विभाजित किया गया था, और प्रत्येक सेल का अपना एक बेस स्टेशन होता था। इस प्रणाली ने एक ही फ़्रीक्वेंसी को अलग-अलग सेल्स में बार-बार इस्तेमाल करने योग्य बनाया, जिससे बड़े पैमाने पर मोबाइल कनेक्टिविटी संभव हो सकी।





