लखनऊ

उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की चर्चित आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल का प्रशासनिक सफर एक बार फिर सुर्खियों में है। आईआईटी दिल्ली, आईआईएम बैंगलोर और लंदन में जेपी मॉर्गन जैसी दिग्गज फर्म में बतौर ट्रेडर काम कर चुकीं दिव्या मित्तल ने जनसेवा के संकल्प के साथ भारत लौटकर यूपीएससी में 68वीं रैंक हासिल की थी। हालांकि, एक दशक से अधिक के अपने कार्यकाल के दौरान वह न केवल अपने विकास कार्यों और 'जनचौपाल' के जरिए जनता की चहेती बनीं, बल्कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों के साथ अपनी बेबाक कार्यशैली को लेकर लगातार चर्चा में रहीं।

सियासत से टकराव: देवरिया से मिर्जापुर तक के चर्चित विवाद

  • देवरिया का ट्रांसफर विवाद (जुलाई 2025): देवरिया जिलाधिकारी (DM) रहते हुए जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (DISHA) की बैठक में जनप्रतिनिधियों के सामने उन्होंने प्रशासनिक मर्यादा का पाठ पढ़ाते हुए कहा था कि "अधिकारियों-कर्मचारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग के लिए प्रशासन पर अनुचित दबाव न बनाया जाए।" उनके इस बयान पर यूपी के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी।
  • मिर्जापुर में 'लहुरियादह' प्रोजेक्ट व विदाई का दौर: मिर्जापुर डीएम के रूप में उन्होंने सुदूर पहाड़ी गांव लहुरियादह में पहली बार नल का पानी पहुंचाया। लेकिन उद्घाटन के श्रेय को लेकर स्थानीय सांसद और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के खेमे से नाराजगी की खबरें आईं।
  • 10 महीने की 'वेटिंग फॉर पोस्टिंग': सितंबर 2023 में मिर्जापुर से तबादला होने पर जनता ने उन पर फूलों की बारिश कर विदाई दी थी। इसके तुरंत बाद शासन ने उनका बस्ती तबादला रद्द कर उन्हें सितंबर 2023 से जुलाई 2024 तक बिना किसी पद के वेटिंग में रखा था।

दिव्या मित्तल का प्रशासनिक ट्रैक रिकॉर्ड

पद / भूमिकाक्षेत्र / विभागमुख्य बिंदु
प्रारंभिक सेवाएंएसडीएम मेरठ, सिधौली (सीतापुर)प्रशासनिक अनुभव की शुरुआत
असिस्टेंट सेक्रेटरीनीति आयोगपीएमओ में प्रेजेंटेशन की सराहना हुई
सीडीओ व उपाध्यक्षगोंडा / बरेली विकास प्राधिकरणशहरी व ग्रामीण विकास प्रोजेक्ट्स
जिलाधिकारी (DM)संत कबीरनगर, मिर्जापुर, देवरियानल से जल योजना व जनचौपाल के लिए चर्चित
विशेष सचिवराजस्व विभाग, उत्तर प्रदेशमई 2026 से इस्तीफे के ऐलान तक

"मूर्ख थी जो सोचा कुछ देने आई हूं..." — भावुक संदेश से इस्तीफे की घोषणा

पद छोड़ते हुए दिव्या मित्तल ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा कि देश की मिट्टी का कर्ज चुकाने के लिए उन्होंने विदेश की नौकरी छोड़ी थी।

"देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना कर्तव्य है, मिर्जापुर ने सिखाया कि असंभव बस एक राय है और मां विंध्यवासिनी के चरणों में सीखा कि शक्ति पद से नहीं, विश्वास से आती है। मूर्ख थी जो सोचा था कि कुछ देने आई हूं, सच यह है कि सबसे ज्यादा मैंने ही पाया... आज पद छूटा है, लेकिन देश के लिए देखा सपना कभी नहीं छूटेगा।"