रांची

झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC-CGL) परीक्षा को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले के बाद चयनित अभ्यर्थियों का आक्रोश चरम पर पहुंच गया है। जिन उम्मीदवारों की नियुक्ति हो चुकी थी और जो बाकायदा अपने पदों पर सेवाएं दे रहे थे, वे अपनी आजीविका और भविष्य की सुरक्षा के लिए रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं।

हाथों में दस्तावेज लिए प्रदर्शनकारी सरकार के इस कदम को सरासर अन्याय बता रहे हैं और मामले में निष्पक्ष जांच की गुहार लगा रहे हैं।

"सारे दस्तावेज साथ लाया हूं, CBI जांच कराइए पर जिंदगी तबाह न कीजिए"

प्रोजेक्ट भवन के बाहर जमा एक अभ्यर्थी ने मीडिया के सामने अपने दस्तावेज दिखाते हुए बेहद भावुक अपील की:

"हम हर तरह की जांच के लिए तैयार हैं। जो गलत है, उस पर सख्त कार्रवाई कीजिए, लेकिन चंद दोषियों के चक्कर में हम जैसे हजारों निर्दोषों के साथ यह अन्याय मत कीजिए। आप सीबीआई (CBI) जांच कराइए या जो जांच करनी है कीजिए, लेकिन हमारे साथ ऐसा बर्ताव न करें... हम मर जाएंगे।"

एक अन्य युवा अभ्यर्थी ने आंखों में आंसू लिए अपने परिवार को ढांढस बंधाते हुए कहा कि सरकार के इस फैसले ने उन्हें रातों-रात सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा, "मैं अपने माता-पिता से कहना चाहता हूं कि धैर्य रखें, हम अपने हक की लड़ाई फिर जीतेंगे। यह फैसला कोर्ट के आदेश और इंसाफ की हार जैसा है।"

"100 दोषी छूट जाएं पर एक निर्दोष को सजा न मिले"— न्यायपालिका के सिद्धांत पर सवाल

प्रदर्शन में शामिल अभ्यर्थियों ने सरकार की कार्यशैली और एकतरफा प्रक्रिया पर कड़े सवाल उठाए हैं। चयनित अभ्यर्थी चंदा कुमारी ने कहा:

  • न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन: हमारी न्याय प्रणाली इस बात पर चलती है कि 100 दोषी भले छूट जाएं, पर एक भी निर्दोष को सजा नहीं मिलनी चाहिए। लेकिन इस फैसले ने हजारों निर्दोष युवाओं को सीधे सजा दे दी है।
  • एकतरफा कार्रवाई: पिछले 24 दिनों से सरकार ने सिर्फ एक पक्ष की बात सुनी। चयनित अभ्यर्थियों को अपना पक्ष रखने तक का अवसर नहीं दिया गया।
  • सिस्टम की नाकामी: परीक्षा रद्द कर देना व्यवस्था सुधारने का समाधान नहीं है। इससे असली दोषियों का पता लगाने के बजाय मेहनत करने वाले अभ्यर्थी पिस रहे हैं।

फिलहाल प्रोजेक्ट भवन के बाहर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं।