झारखंड में JSSC CGL परीक्षा (21-22 सितंबर 2024) को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों और राज्य सरकार के बीच आखिरकार बातचीत का रास्ता खुलता नजर आ रहा है। सरकार की ओर से मिले 'टेबल टॉक' के निमंत्रण को छात्रों ने अपने कानूनी सलाहकारों के साथ शामिल होने की शर्त पर स्वीकार कर लिया है। हालांकि, परीक्षा को रद्द करने और पूरे मामले की CBI जांच कराने की मांग पर छात्र अभी भी पूरी मजबूती से अड़े हुए हैं।
CID और SIT की जांच पर क्यों नहीं है छात्रों को भरोसा?
न्यायिक रिकॉर्ड और SIT की जांच रिपोर्ट में कई ऐसे गंभीर तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने परीक्षा की निष्पक्षता पर गहरे सवाल खड़े किए हैं:
- नेपाल (बीरगंज) कनेक्शन: जांच में 28 अभ्यर्थियों के नेपाल के बीरगंज जाने और पैसे के लेनदेन की बात उजागर हुई। इनमें से 15 अभ्यर्थियों की मोबाइल लोकेशन बीरगंज, रक्सौल और मोतिहारी पाई गई।
- सफल अभ्यर्थियों का चयन: नेपाल गए 28 अभ्यर्थियों में से 10 अभ्यर्थी परीक्षा में सफल घोषित हुए हैं (जिनका चयन फिलहाल अंतिम जांच के अधीन है)।
- सवाल-जवाब रटाने का खेल: अभ्यर्थियों को कोई मूल प्रश्नपत्र नहीं दिया गया था, बल्कि 5-6 हस्तलिखित पन्नों पर उत्तर याद कराए गए थे। गवाहों के मोबाइल से मिले 123 अलग-अलग उत्तरों में से 66 उत्तर (लगभग 53%) परीक्षा के 'Set-A' प्रश्नपत्र से मैच हुए।
विवाद का मुख्य पेंच: संगठित लीक बनाम SIT की दलील
| पक्षजांच एजेंसी / कोर्ट का तर्क (SIT & High Court)आंदोलनकारी छात्रों का रुख | ||
| प्रश्नपत्र की बरामदगी | किसी भी मोबाइल/इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से पूरा 150 प्रश्नों वाला मूल प्रश्नपत्र बरामद नहीं हुआ। | हस्तलिखित पन्नों पर 53% उत्तरों का मैच होना साबित करता है कि परीक्षा से पहले उत्तर उपलब्ध कराए गए थे। |
| संगठित लीक का प्रमाण | संगठित तरीके से प्रश्नपत्र लीक होने का पुख्ता प्रमाण नहीं मिला। | राज्य की एजेंसियां (CID/SIT) अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय (नेपाल) नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने में नाकाम हैं। |
| आगे की कार्रवाई | हाईकोर्ट के निर्देश पर परिणाम जारी किए गए और SIT को 6 महीने में जांच पूरी करने को कहा गया। | मुख्य सरगना, वित्तीय लेनदेन और पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश केवल CBI जैसी स्वतंत्र एजेंसी ही कर सकती है। |
अब आगे क्या?
छात्रों का स्पष्ट कहना है कि मामला केवल कुछ अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जानना आवश्यक है कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे और कितने अभ्यर्थियों को इसका अनुचित लाभ मिला।
अब सभी की नजरें सरकार और छात्रों के बीच होने वाली उच्च-स्तरीय वार्ता पर टिकी हैं कि क्या सरकार CBI जांच की मांग पर कोई सर्वमान्य रास्ता निकालती है या यह गतिरोध आगे भी जारी रहेगा।





