मुजफ्फराबाद/इस्लामाबाद: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालिया आम चुनावों के बाद सरकार बनाने की तैयारी कर रही पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) के भीतर प्रधानमंत्री पद को लेकर आंतरिक कलह तेज हो गई है। पार्टी अध्यक्ष नवाज शरीफ द्वारा बैरिस्टर इफ्तिखार अली गिलानी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार नामित किए जाने के बाद से ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गहरा असंतोष है और सोशल मीडिया पर भी इस निर्णय की कड़ी आलोचना हो रही है।

चुनाव में मिली हार, फिर भी शीर्ष पद की दावेदारी

विवाद की मुख्य वजह यह है कि इफ्तिखार गिलानी हालिया आम चुनाव में अपनी सीट हार गए थे। इससे पहले 2021 के चुनावों में भी उन्हें शिकस्त का सामना करना पड़ा था। सीधे चुनाव में मिली हार के बाद PML-N ने उन्हें तकनीकी विशेषज्ञों (टेक्नोक्रेट्स) के लिए आरक्षित सीट से विधानसभा भेजा और अब उन्हें सीधे प्रधानमंत्री पद की कमान सौंपी जा रही है।

जनता द्वारा नकार दिए गए नेता को शीर्ष पद देने पर पार्टी के भीतर ही यह सवाल उठ रहा है कि क्या लोकतांत्रिक जनादेश को नजरअंदाज किया जा रहा है?

शाह गुलाम कादिर की अनदेखी से बढ़ी नाराजगी

प्रधानमंत्री पद की दौड़ में PML-N के PoK अध्यक्ष शाह गुलाम कादिर का नाम सबसे आगे माना जा रहा था। हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई बैठक में गिलानी और कादिर के नामों पर चर्चा हुई थी, जिसके बाद अंतिम निर्णय का अधिकार नवाज शरीफ को सौंपा गया था।

नवाज शरीफ द्वारा गिलानी के नाम पर मुहर लगाए जाने के बाद शाह गुलाम कादिर के साथ-साथ पूर्व प्रधानमंत्री राजा फारूक हैदर भी पार्टी नेतृत्व से बेहद नाराज बताए जा रहे हैं।

'आग में घी डालने जैसा फैसला'

सोशल मीडिया पर भी PML-N के इस कदम की तीखी आलोचना हो रही है। वरिष्ठ पत्रकारों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे समय में जब PoK में पहले से ही जन-असंतोष और आंदोलन का माहौल है, एक हारे हुए नेता को आरक्षित सीट के जरिए PM बनाना जनता के आक्रोश को और बढ़ा सकता है।

बहुमत का आंकड़ा PML-N के पक्ष में

आंतरिक बगावत के बावजूद, विश्लेषकों का मानना है कि सरकार गठन पर फिलहाल कोई तात्कालिक संकट नहीं है:

  • कुल सीटें: 53 सदस्यीय PoK विधानसभा में PML-N के पास 32 सीटें हैं।
  • बहुमत का आंकड़ा: सरकार बनाने या PM चुनाव के लिए 27 वोटों की आवश्यकता है।

ऐसे में यदि पार्टी के दो-तीन वरिष्ठ विधायक नाराज होकर वोटिंग से दूरी भी बना लेते हैं, तब भी संख्याबल के लिहाज से PML-N आसानी से बहुमत साबित करने की स्थिति में बनी हुई है।