नई दिल्ली:

देश में कॉलिंग और इंटरनेट सेवाओं को और अधिक आधुनिक, पारदर्शी और तेज बनाने के लिए भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने एक बड़ा कदम उठाया है। ट्राई ने आधिकारिक रूप से 'दूरसंचार इंटरकनेक्शन (तीसरा संशोधन) विनियम, 2026' जारी कर दिए हैं। टेलीकॉम सेक्टर को पूरी तरह अपग्रेड करने वाले ये नए और संशोधित नियम आने वाली 1 जनवरी 2027 से पूरे देश में प्रभावी हो जाएंगे।

क्या होता है इंटरकनेक्शन और बदलाव की क्यों पड़ी जरूरत?

टेलीकॉम की तकनीकी भाषा में इंटरकनेक्शन वह व्यवस्था है जिसके जरिए अलग-अलग कंपनियों (जैसे जियो, एयरटेल, Vi आदि) के नेटवर्क आपस में जुड़ते हैं। इसी व्यवस्था के कारण एक कंपनी का यूजर दूसरी कंपनी के यूजर को बिना किसी रुकावट के फोन कर पाता है या डाटा शेयर कर पाता है। मौजूदा समय की आधुनिक नेटवर्क तकनीकों (जैसे 5G और भविष्य की तकनीकें) के अनुकूल बुनियादी ढांचे को ढालने के लिए ट्राई ने इन नियमों में बड़ा बदलाव किया है।

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नए नियमों की 5 मुख्य बातें और बड़े बदलाव:

  1. एलएसए स्तर पर शिफ्ट होगा ट्रैफिक:
  2. अब तक कॉलिंग और डेटा का ट्रैफिक पुराने लॉन्ग डिस्टेंस (LDCA) और शॉर्ट डिस्टेंस (SDCA) चार्जिंग एरिया के पॉइंट्स ऑफ इंटरकनेक्शन (POI) पर होता था। अब इसे बदलकर लाइसेंस प्राप्त सेवा क्षेत्र (LSA) स्तर के पीओआई पर शिफ्ट किया जाएगा। इससे रूटिंग सरल होगी, कॉल लेटेंसी (देरी) घटेगी और उपभोक्ताओं को कॉल ड्रॉप-फ्री अनुभव मिलेगा। मौजूदा ट्रैफिक को अगले तीन साल में चरणबद्ध तरीके से शिफ्ट किया जाएगा।
  3. पारंपरिक तकनीक से 'आईपी (IP) आधारित नेटवर्क' की ओर:
  4. भविष्य में स्थापित होने वाले सभी नए इंटरकनेक्शन पूरी तरह से इंटरनेट प्रोटोकॉल (IP) आधारित होंगे। पुराने E1/TDM तकनीक वाले पीओआई को भी अगले तीन वर्षों में आईपी आधारित तकनीक में बदला जाएगा। इससे बैंडविड्थ का बेहतरीन इस्तेमाल होगा और कॉल क्वालिटी बेहद शानदार मिलेगी।
  5. पीओआई (POI) सरेंडर करने का आसान नियम:
  6. नियमों में पहली बार ऑपरेटरों के लिए स्वेच्छा से पीओआई 'सरेंडर' करने का स्पष्ट ढांचा बना दिया गया है। ट्रैफिक घटने या बिजनेस रणनीति बदलने पर कंपनियां अब आसानी से और तय कानूनी-वित्तीय प्रक्रिया के तहत पीओआई सरेंडर कर सकेंगी।
  7. ब्याज और बैंक गारंटी के कड़े प्रावधान:
  8. इंटरकनेक्शन उपयोग शुल्क (IUC) के भुगतान में देरी पर आपसी सहमति से तय ब्याज दर किसी भी स्थिति में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की एक वर्षीय MCLR से 2% अधिक नहीं हो सकती। इसके अलावा बैंक गारंटी के पुनर्मूल्यांकन की अवधि को 6 महीने से बढ़ाकर 12 महीने कर दिया गया है।
  9. उल्लंघन पर सख्त वित्तीय जुर्माना:
  10. नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए ट्राई ने उल्लंघनों की गंभीरता के आधार पर एक चरणबद्ध वित्तीय दंड (Financial Penalty) का कड़ा ढांचा तैयार किया है।

उपभोक्ताओं को क्या होगा फायदा?

इन तमाम तकनीकी और प्रशासनिक बदलावों का सीधा लाभ देश के आम मोबाइल और इंटरनेट यूजर्स को मिलेगा। आने वाले समय में उपभोक्ताओं को बिना किसी रुकावट के हाई-स्पीड इंटरनेट, बेहतरीन कॉल क्वालिटी और एक भरोसेमंद टेलीकॉम नेटवर्क का अनुभव प्राप्त होगा।

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