वाशिंगटन डीसी:
अमेरिकी मिडटर्म (मध्यवर्ती) चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की करारी हार और सत्ता के समीकरण बदलने के तुरंत बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी विदेश नीति में दो ऐतिहासिक और चौंकाने वाले बड़े बदलावों का ऐलान किया है। 'फाइनेंशियल टाइम्स' से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका अब ईरान पर हमले की कोई योजना नहीं बना रहा है और दोनों देशों के बीच जल्द ही शांति वार्ता आयोजित की जाएगी। इसके साथ ही ट्रंप ने इजराइल को दी जाने वाली सालाना 4 बिलियन डॉलर (लगभग 4 अरब अमेरिकी डॉलर) की आर्थिक व सैन्य मदद पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की घोषणा की है।
1. ईरान से शांति वार्ता का प्रस्ताव और हमले का प्लान रद्द
मिडटर्म चुनाव में आए निराशाजनक नतीजों के बाद ट्रंप के रुख में नरमी देखने को मिली है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "ईरान पर आगे हमला करने का अब कोई प्लान नहीं है। हम युद्ध के बारे में नहीं सोच रहे हैं और इस पर बाद में विचार होगा। अभी स्थिति नियंत्रण में है।"
उन्होंने आगे खुलासा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की प्रक्रिया चल रही है और बहुत जल्द दोनों देशों के बीच आधिकारिक शांति वार्ता की तारीख तय की जाएगी। उल्लेखनीय है कि मतदान से ठीक पहले (सोमवार, 2 नवंबर को) अमेरिका ने ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण केशम द्वीप (Qeshm Island) पर हमला किया था, लेकिन इस सैन्य कदम का ट्रंप की पार्टी को कोई राजनीतिक या चुनावी लाभ नहीं मिला।
2. इजराइल की $4 बिलियन की सालाना मदद पर रोक
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को हिलाकर रख देने वाले एक अन्य फैसले में ट्रंप ने इजराइल को दी जाने वाली सालाना 4 अरब डॉलर की सहायता राशि रोकने का ऐलान किया है। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा:
"हमने इस निर्णय के बारे में इजराइल के प्रधानमंत्री को सूचित कर दिया है। इजराइल को अब आगे से हम कोई सीधी आर्थिक या वित्तीय मदद नहीं देंगे। हालांकि, यदि वे चाहें तो हम उन्हें हथियार बेच सकते हैं।"
चुनाव परिणाम: कांग्रेस और सीनेट दोनों में रिपब्लिकन की हार
ताजा चुनावी आंकड़ों के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में भारी नुकसान उठाना पड़ा है। जहां विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (कांग्रेस) में पूर्ण बहुमत के साथ नियंत्रण हासिल कर लिया है, वहीं सीनेट में भी रिपब्लिकन पार्टी काफी पिछड़ गई है।
इसे भी पढ़ेंः औपनिवेशिक अतीत का सच और ब्रिटेन का रुख: गुलामी के दर्द पर माफी, पर मुआवजे से तौबा
विश्लेषण: ट्रंप ने आखिर क्यों लिए ये दो बड़े फैसले?
राजनीतिक और कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, इस अचानक आए बदलाव के पीछे 3 मुख्य कारण हैं:
- अमेरिका में बढ़ती महंगाई और जनआक्रोश (AP रिपोर्ट): 'एसोसिएटेड प्रेस' के अनुसार, मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार का सबसे बड़ा कारण अमेरिका में तेजी से बढ़ती महंगाई रही। ईरान के साथ बढ़ते तनाव और युद्ध के माहौल के कारण तेल की कीमतें बढ़ीं, जिससे आम अमेरिकी नागरिक जूझ रहे थे। ट्रंप प्रशासन महंगाई पर काबू पाने में पूरी तरह नाकाम रहा, जिसका खामियाजा उन्हें वोटों के रूप में भुगतना पड़ा।
- संसद (कांग्रेस) में बहुमत का खत्म होना: अब जब प्रतिनिधि सभा (Congress) पर विपक्षी डेमोक्रेट्स का कब्जा हो चुका है, तो ट्रंप के लिए नए युद्ध की घोषणा करना या रक्षा बजट पास कराना नामुमकिन जैसा होगा। डेमोक्रेट्स अब ट्रंप के सैन्य फैसलों और विदेश नीति की कड़ी समीक्षा करेंगे।
- इजराइल में राजनीतिक अनिश्चितता: इजराइल में हुए हालिया चुनावों में बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। वहां गठबंधन के जरिए गादी आइजनकोट (Gadi Eizenkot) के नेतृत्व में नई सरकार बनने के आसार हैं। इजराइल के इस नए और अस्पष्ट राजनीतिक परिदृश्य के कारण भी ट्रंप ने खुद को इजराइल से थोड़ा दूर करने का फैसला किया है।
#USPolitics #DonaldTrump #USMidterms #IranUSNews #IsraelAid #WhiteHouse #ForeignPolicy #BreakingNews #GlobalPolitics #WorldNewsHindi





