वाशिंगटन / नई दिल्ली:

अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में दो दशकों से अधिक समय तक अपनी बेमिसाल सेवाएं देने के बाद अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) की 1.5 टन वजनी 'नील गेहरेल्स स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी' (Neil Gehrels Swift Observatory) आज (बुधवार) पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश कर रही है। वायुमंडल में घर्षण के दौरान इस वेधशाला का अधिकांश हिस्सा जलकर नष्ट हो जाएगा, लेकिन इसके बचे हुए मलबे के टुकड़े पृथ्वी के विभिन्न हिस्सों में गिरने की संभावना जताई गई है।

भारत के दक्षिणी शहर भी संभावित री-एंट्री ज़ोन में शामिल

वैज्ञानिकों की योजना मलबे के मुख्य हिस्सों को नियंत्रित या प्राकृतिक रूप से महासागर में गिराने की है। हालांकि, खगोलीय गणनाओं के अनुसार इसके संभावित री-एंट्री पाथ (मार्ग) में भारत, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण-पूर्व एशिया तथा मध्य व दक्षिण अमेरिका के कुछ क्षेत्र आ सकते हैं।

भारत की बात करें तो इसके दक्षिणी व तटीय क्षेत्रों के ऊपर से गुजरने की संभावना है। जिन प्रमुख शहरों के आसपास मलबे के गिरने या गुजरने का अनुमान जताया गया है, उनमें शामिल हैं:

  • मुंबई और भुवनेश्वर
  • हैदराबाद और बेंगलुरु
  • चेन्नई और कोच्चि

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नोट: इस घटनाक्रम को लेकर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की तरफ से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान या अलर्ट जारी नहीं किया गया है।

2004 में हुई थी लॉन्चिंग: गामा-रे बर्स्ट के अध्ययन का ऐतिहासिक मिशन

इस वेधशाला को वर्ष 2004 में ब्रह्मांड के सबसे शक्तिशाली और रहस्यमयी विस्फोटों—'गामा-रे बर्स्ट' (Gamma-Ray Bursts) का अध्ययन करने के उद्देश्य से अंतरिक्ष में भेजा गया था। अपने लॉन्च के समय यह दुनिया की पहली ऐसी 'मल्टीवेवलेंथ' (बहु-तरंगदैर्ध्य) वेधशाला थी, जिसमें तीन उन्नत टेलीस्कोप लगाए गए थे।

22 वर्षों में नासा के इन महत्वपूर्ण मिशनों में दिया योगदान

नासा के अनुसार, स्विफ्ट वेधशाला ने दो दशकों से भी अधिक समय तक कार्य करते हुए मानव जाति की ब्रह्मांडीय समझ को पूरी तरह बदल दिया। अपने कार्यकाल के दौरान इसने निम्नलिखित क्षेत्रों में क्रांतिकारी खोजें कीं:

  • सुपरमैसिव ब्लैक होल: ब्लैक होल से संचालित होने वाली अत्यधिक ऊर्जावान सक्रिय आकाशगंगाओं का अध्ययन।
  • सुपरनोवा व एक्स-रे फ्लेयर्स: तारों में होने वाले भीषण एक्स-रे धमाकों और सुपरनोवा विस्फोटों की मैपिंग।
  • सौर मंडल के पिंड: हमारे अपने सौर मंडल में मौजूद धूमकेतुओं (Comets) और क्षुद्रग्रहों (Asteroids) का विस्तृत अवलोकन।

22 साल की अपनी ऐतिहासिक वैज्ञानिक यात्रा पूरी करने के बाद, यह वेधशाला अब अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में अपने सुनहरे पन्नों को दर्ज कराकर शांत होने जा रही है।

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