होर्मुज स्ट्रेट में छह महीने से जारी रुक-रुक कर युद्ध के बाद आई अस्थाई शांति रविवार को उस समय भंग हो गई, जब अमेरिकी सेना ने एक महीने में अपनी पहली बड़ी सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के जवान स्ट्रेट के अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट पर सी-माइन्स (समुद्री बारूदी सुरंगें) बिछाने और रॉकेट लॉन्च करने की तैयारी में थे, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।
इस हमले के बाद ईरान ने तुरंत जवाबी हमला करते हुए अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाया, जिसमें दो लोगों की मौत की खबर है। ईरान के गार्ड प्रवक्ता जनरल होसैन मोहेबी ने इसे ट्रंप प्रशासन की "घातक गलती" करार देते हुए सैन्य और आर्थिक दोनों मोर्चों पर कड़ा बदला लेने की चेतावनी दी है।
अमेरिका की रणनीति में बदलाव और आर्थिक दबाव 29 जुलाई के बाद अमेरिका का यह पहला बड़ा हमला है। इससे पहले 1 अगस्त को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खाड़ी सहयोगियों (कतर, सऊदी अरब, यूएई) के आग्रह पर नए सैन्य हमले रोकने के आदेश दिए थे।
अमेरिका अब सैन्य अभियानों की जगह कड़े आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। हालांकि, लंबे समय से जारी इस संघर्ष के कारण अमेरिकी हथियारों के घटते भंडार ने वैश्विक सुरक्षा तैयारियों पर चिंताएं बढ़ा दी हैं। वहीं राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि वे ईरान को बातचीत की मेज पर लाने की कोई जल्दबाजी में नहीं हैं।
वैश्विक तेल व्यापार और होर्मुज का संकट दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल व्यापार के प्रवेश द्वार 'होर्मुज स्ट्रेट' में तनाव का असर वैश्विक शिपिंग पर साफ दिख रहा है:
- व्यापार में भारी गिरावट: युद्ध से पहले जहां प्रतिदिन करीब 130 जहाज गुजरते थे, वहीं अब यह संख्या सिमटकर महज 24 रह गई है।
- नौसैनिक नाकेबंदी: अमेरिकी सेना ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी करते हुए 83 वाणिज्यिक जहाजों का रास्ता बदला है और 3 को जब्त किया है।
- हमले जारी: ब्रिटेन की निगरानी एजेंसी (UKMTO) के अनुसार, ओमान के खसाब के उत्तर में शनिवार को एक टैंकर पर प्रोजेक्टाइल से अज्ञात हमला भी दर्ज किया गया।
ईरान को $270 अरब का भारी नुकसान इजराइली और अमेरिकी अभियानों में ईरान के शीर्ष सैन्य व धार्मिक नेतृत्व को भारी नुकसान पहुंचा है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, देश को अब तक $270 अरब (लगभग 227 लाख करोड़ रुपये) का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नुकसान उठाना पड़ा है। इसके बावजूद, तेहरान ने हाल ही में अपने कड़े सुरक्षा नेतृत्व में नई नियुक्तियां कर यह स्पष्ट कर दिया है कि वह झुकने के मूड में नहीं है।





