मोहाली/चंडीगढ़: भारतीय घरेलू क्रिकेट (रणजी ट्रॉफी) में इन दिनों पंजाब के विकेटकीपर-बल्लेबाज सलिल अरोड़ा का बल्ला आग उगल रहा है। अपनी शानदार और बेहतरीन फॉर्म से सनसनी मचा चुके सलिल ने आंध्र प्रदेश के खिलाफ एक बार फिर दबाव भरी स्थिति में शानदार शतकीय पारी खेलकर अपनी टीम को संकट से बाहर निकाला है। इस सत्र में सलिल के बल्ले का जादू ऐसा चल रहा है कि उन्होंने अब तक खेले गए सभी चार मैचों में चार लगातार शतक जड़कर इतिहास रच दिया है।

महज 71 रन पर गिरे थे 5 विकेट, फिर संभाली कमान

आंध्र प्रदेश के खिलाफ खेले जा रहे मुकाबले में पंजाब की शुरुआत बेहद खराब रही। टीम के शीर्ष और मध्यक्रम के बल्लेबाज पिच पर टिकने में नाकाम रहे और स्कोरबोर्ड पर महज 71 रन के कुल योग पर 5 महत्वपूर्ण विकेट गिर चुके थे।

सलामी बल्लेबाज विहान मल्होत्रा (30 रन) और प्रभसिमरन सिंह (24 रन) के आउट होने के बाद पारी लड़खड़ा गई। इसके बाद जश्नप्रीत सिंह (1), कप्तान उदय सहारन (बिना खाता खोले शून्य पर) और रमनदीप सिंह (पहली ही गेंद पर आउट) सस्ते में पवेलियन लौट गए। टीम भारी संकट में थी, ऐसे में विकेटकीपर बल्लेबाज सलिल अरोड़ा ने क्रीज पर कदम रखा।

सलिल और सनवीर की रिकॉर्ड साझेदारी

मुश्किल हालात से उबारते हुए सलिल अरोड़ा ने सनवीर सिंह के साथ मिलकर एक अति-महत्वपूर्ण और शानदार साझेदारी की। दोनों बल्लेबाजों ने मिलकर स्टंप्स तक 347 गेंदों में 205 रनों की नाबाद/अखंड साझेदारी कर पारी को संभाल लिया। सलिल के शतक पूरा करने के बाद सनवीर सिंह ने भी अपनी बेहतरीन शतकीय पारी पूरी की।

इस सीजन सलिल अरोड़ा का शतकीय सफर:

सलिल अरोड़ा ने इस रणजी सीजन में अपनी निरंतरता से चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है:

  1. असम के खिलाफ: 110 रनों की शानदार पारी
  2. छत्तीसगढ़ के खिलाफ: 107 रनों की जुझारू पारी
  3. हैदराबाद के खिलाफ: 151 रनों की विशाल पारी
  4. आंध्र प्रदेश के खिलाफ: एक और शानदार शतकीय पारी (जारी)

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पिता के अधूरे सपने को दे रहे हैं उड़ान

सलिल अरोड़ा की यह सफलता जितनी शानदार है, उतनी ही प्रेरणादायक उनकी संघर्ष भरी जीवन यात्रा है। सलिल अपने पिता राकेश अरोड़ा के अधूरे सपने को पूरा कर रहे हैं। उनके पिता जिला स्तर तक क्रिकेट खेलते थे, लेकिन आजीविका और परिवार चलाने के कारण उन्हें अपना क्रिकेट करियर छोड़ना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने अपने बेटे को बड़ा क्रिकेटर बनाने का संकल्प लिया।

सलिल ने 11-12 वर्ष की उम्र में क्रिकेट का ककहरा सीखना शुरू किया। शुरुआती दौर में वे U-14 और U-16 जिला टीम में चयनित नहीं हो पाए थे, लेकिन अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने सीधे अंडर-19 टीम में जगह बनाई। वर्ष 2024 में उनके पिता का निधन हो गया, जो सलिल के जीवन का सबसे कठिन दौर था। हालांकि, बड़े भाई के निरंतर समर्थन और अपनी कड़ी मेहनत के बल पर उन्होंने हार नहीं मानी। आईपीएल में सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) की टीम का हिस्सा बनने के बाद अब वे डोमेस्टिक क्रिकेट में अपने दमदार प्रदर्शन से लगातार चमक रहे हैं।

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