रांची / नई दिल्ली:

झारखंड में बुनियादी ढांचे के विकास और महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच तनातनी गहरा गई है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने हेमंत सोरेन सरकार द्वारा भेजी गई कई महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं के प्रस्तावों को खारिज कर दिया है। केंद्र सरकार ने इस फैसले के पीछे जमीन की अनुपलब्धता, फॉरेस्ट क्लीयरेंस में विलंब और तकनीकी स्वीकृतियों के लंबित रहने को मुख्य कारण बताया है।

प्रस्तावित योजनाएं जो हुईं खारिज

केंद्रीय मंत्रालय द्वारा जिन प्रमुख परियोजनाओं की मंजूरी रोकी गई है, उनमें राज्य की भारी लागत वाली कई रणनीतिक सड़कें शामिल हैं:

  • हजारीबाग-बगोदर सड़क परियोजना
  • हाटगम्हरिया-नोवामुंडी-बराईबुरू सड़क
  • एनएच-6 पर चाईबासा-हाटगम्हरिया सड़क पर प्रस्तावित रेलवे ओवरब्रिज (ROB)

पेनल्टी और कंटीजेंसी फंड को लेकर आमने-सामने केंद्र-राज्य

परियोजनाओं में अत्यधिक देरी और तय शर्तों का पालन न करने पर केंद्रीय मंत्रालय ने झारखंड के पथ निर्माण विभाग पर जुर्माना (Penalty) लगाया है। इसके बाद केंद्र और राज्य के बीच विवाद और बढ़ गया है:

  • राज्य का रुख: पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों ने केंद्र के अधिकार क्षेत्र पर सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि राज्य पर जुर्माना लगाने का केंद्रीय मंत्रालय के पास कोई कानूनी आधार नहीं है।
  • कंटीजेंसी फंड पर रोक: राज्य सरकार ने आरोप लगाया है कि केंद्र ने आपातकालीन (Contingency) फंड का भुगतान रोक दिया है, जिससे चालू वित्तीय प्रबंधन और अन्य चालू कार्य प्रभावित हो रहे हैं। राज्य ने केंद्रीय मंत्रालय को आधिकारिक पत्र भेजकर बकाया राशि जल्द जारी करने की मांग की है।

सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर के भविष्य पर अनिश्चितता

हालाँकि केंद्र सरकार पूर्व में झारखंड की कई प्रमुख सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दे चुकी है, लेकिन ताजा प्रस्तावों को प्रक्रियात्मक और तकनीकी कमियों का हवाला देते हुए खारिज कर दिया गया है। इससे राज्य की कई महत्वपूर्ण ढांचागत विकास योजनाओं के निष्पादन पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।