मुंबई: ओटीटी की सबसे लोकप्रिय वेब सीरीज 'मिर्जापुर' में 'जरीना' का किरदार निभाकर घर-घर में पहचान बनाने वाली अभिनेत्री अनंग्शा बिस्वास अब 'मिर्जापुर द मूवी' के जरिए बड़े पर्दे पर वापसी कर रही हैं। जहां इस सीरीज ने उनके करियर को नई बुलंदियां दीं, वहीं इस ऑन-स्क्रीन किरदार के कारण उन्हें निजी जिंदगी में कई गंभीर और अप्रिय चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा।
अनंग्शा ने खुलासा किया कि कुछ दर्शकों ने उनके ऑन-स्क्रीन बोल्ड किरदार और उनकी असल जिंदगी की शख्सियत में फर्क करना बंद कर दिया, जिससे उनके बारे में एक गलत धारणा बन गई।
नेगेटिव रिएक्शन्स से सहम गई थीं अभिनेत्री
हिंदी रश को दिए इंटरव्यू में अनंग्शा ने पहले सीजन के बाद मिले अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि वे सोशल मीडिया पर आने वाले कमेंट्स और भद्दे मेल्स से बहुत परेशान हो गई थीं।
"सीजन वन के बाद मैं काफी सहम गई थी। मेरे लिए यह सब बहुत नया था। जब मैंने अपने काम को पूजा (सरस्वती) मानकर पूरी ईमानदारी से किया, तो मुझे समझ नहीं आ रहा था कि लोग इतने नेगेटिव रिएक्शन्स क्यों दे रहे हैं। हालांकि, बाद में मैंने समझा कि हर कोई आपके काम को पसंद नहीं कर सकता।"
'एक रात के क्या लेंगी?'— इनबॉक्स में आते थे भद्दे मैसेजेस
जरीना की नकारात्मक और महत्वाकांक्षी छवि के कारण कुछ लोगों ने उनके बारे में बेहद आपत्तिजनक राय बना ली। अनंग्शा ने बताया कि उन्हें अश्लील मांगों और भद्दे मैसेजेस का सामना करना पड़ा।
"ऐसे मेल्स से मेरा इनबॉक्स भरा रहता था कि 'आप एक रात के क्या लेंगी?' मैं आमतौर पर अपने इंस्टाग्राम बायो में दिए लिंक पर भी नहीं जाती। मैं इस बारे में बात नहीं करना चाहती थी, लेकिन समाज की इस सोच को बदलने के लिए इस मुद्दे पर बोलना बेहद जरूरी है।"
जरीना की छवि: वरदान और अभिशाप दोनों
अनंग्शा मानती हैं कि जरीना के किरदार से बनी छवि उनके लिए एक वरदान भी है और अभिशाप भी। वे कहती हैं कि अगर लोग उन्हें वैसा समझ रहे हैं, तो इसका मतलब है कि उन्होंने अपना अभिनय पूरी निष्ठा के साथ निभाया है। हालांकि, वे असल जिंदगी में जरीना से बिल्कुल अलग हैं:
- निजी जिंदगी का तरीका: वे पार्टियों में नहीं जातीं, शराब नहीं पीतीं और अनर्गल बातें करने की जगह अकेला रहना पसंद करती हैं।
- किताबी कीड़ा: वे खुद को किताबी कीड़ा मानती हैं और पढ़ने का शौक रखती हैं।
- सांस्कृतिक जड़ें: अनंग्शा ने जोर देकर कहा कि वे बंगाल से आती हैं—रवींद्रनाथ टैगोर और सत्यजीत रे की धरती से—और एक पढ़ी-लिखी पृष्ठभूमि से संबंध रखती हैं।
- महत्वाकांक्षा का फर्क: जरीना की तरह वे भी महत्वाकांक्षी हैं, लेकिन उनके लिए सफलता पाने का सही तरीका और रास्ता बहुत मायने रखता है, जबकि जरीना के लिए रास्ते की नैतिकता अहम नहीं थी।





