रांची:
झारखंड में सरकारी नौकरियों में नियुक्ति और बर्खास्तगी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) जैसी परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली और भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच हेमंत सोरेन सरकार चौतरफा घिर गई है। परीक्षाओं के रद्द होने और बर्खास्तगी के आदेश पर झारखंड हाईकोर्ट से स्टे मिलने के बाद आंदोलनकारी छात्रों का गुस्सा चरम पर पहुंच गया है।
1. छात्र आंदोलन और 'छल' के आरोप
लगभग 2,000 अभ्यर्थियों को दिए गए नियुक्ति पत्रों को रद्द करने और 2014 से अब तक की 22 परीक्षाओं को रद्द करने के सरकार के फैसले के बावजूद छात्र शांत नहीं हैं।
- CBI जांच पर अड़े छात्र: आंदोलनकारी छात्रों का स्पष्ट मानना है कि राज्य की CID एजेंसी सरकार के अधीन है, जिससे निष्पक्ष जांच संभव नहीं है। वे केवल CBI जांच या जजों की स्वतंत्र कमेटी से जांच की मांग पर अड़े हैं।
- कमजोर पैरवी का आरोप: हाईकोर्ट द्वारा सरकार के बर्खास्तगी आदेश पर रोक लगाए जाने के बाद छात्रों के बीच यह संदेश तेजी से फैल रहा है कि सरकार ने जान-बूझकर अदालत में अपना पक्ष कमजोर तरीके से रखा ताकि मामला लटक सके।
- दोहरा विरोध: सोरेन सरकार ने उन लोगों को भी अपना विरोधी बना लिया है जिनकी नौकरियां छीनने का आदेश दिया गया था, और उन अभ्यर्थियों को भी जो पूरी प्रक्रिया को रद्द कर CBI जांच चाहते हैं।
2. जेपीएससी/जेएसएससी में प्रशासनिक संकट
भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद परीक्षाओं का आयोजन करने वाली संस्थाएं और आयोग पूरी तरह से प्रशासनिक संकट में हैं:
- आयोग के अध्यक्ष को CID द्वारा गिरफ्तार किया जा चुका है।
- कानूनी और प्रशासनिक संकट को देखते हुए आयोग के अन्य सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया है।
3. सरकार पर बढ़ा पुलिसिया व राजनीतिक दबाव
राज्य भर में छात्र मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के जिलावार पुतला दहन का कार्यक्रम चला रहे हैं। रांची और गिरिडीह जैसे जिलों में पुलिस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के समर्थकों द्वारा आंदोलनकारी छात्रों पर बल प्रयोग और लाठीचार्ज की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे छात्रों का आक्रोश और बढ़ गया है।
4. भाजपा की रणनीति: 'जेन जी' से सीधा जुड़ाव
झारखंड के इस सियासी घटनाक्रम पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आक्रामक रुख अपना लिया है:
- अमित शाह का निर्देश: हाल ही में नई दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ झारखंड भाजपा के 8 वरिष्ठ नेताओं (जिनमें 4 पूर्व मुख्यमंत्री शामिल थे) की बैठक हुई। गृहमंत्री ने निर्देश दिया है कि आपसी मतभेद भुलाकर इस 'जेन जी' (Gen Z) छात्र आंदोलन को प्रमुख सियासी मुद्दा बनाया जाए।
- रघुवर दास की सक्रियता: पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास समेत भाजपा के शीर्ष नेता अब सीधे आंदोलनकारी छात्रों से संवाद स्थापित कर सरकार की घेराबंदी में जुट गए हैं।
आगे की राह: अदालत पर टिकी नजरें
अब सभी की नजरें झारखंड हाईकोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं। चूंकि मामले में कई योग्य अभ्यर्थियों का भविष्य भी दांव पर लगा है, इसलिए नैसर्गिक न्याय के तहत संभावना जताई जा रही है कि अदालत स्वयं इस पूरे मामले की जांच सीबीआइ (CBI) को सौंप सकती है। यदि ऐसा होता है, तो राज्य सरकार के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।





