झारखंड: झारखंड के लाखों अभ्यर्थियों के लिए आज का दिन ऐतिहासिक राहत लेकर आया है। झारखंड उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार द्वारा JSSC (झारखंड कर्मचारी चयन आयोग) और JPSC (झारखंड लोक सेवा आयोग) की परीक्षाओं से संबंधित नियुक्ति प्रक्रियाओं को रद्द करने के हालिया आदेश पर अंतरिम रोक (Interim Stay) लगा दी है।
हाई कोर्ट के इस फैसले से लंबे समय से अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता और चिंता से जूझ रहे योग्य अभ्यर्थियों को बड़ी जीत मिली है।
अदालत की सख्त टिप्पणी और निर्देश
मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के रवैये पर सवाल उठाए और अभ्यर्थियों के पक्ष में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए:
- नैसर्गिक न्याय का उल्लंघन: कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि सरकार का फैसला मनमाना था और इसमें 'नैसर्गिक न्याय' (Natural Justice) के सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया।
- ठोस साक्ष्यों का अभाव: अदालत ने टिप्पणी की कि अभी तक ऐसा कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया है जिससे यह साबित हो सके कि कौन-कौन सी धांधलियां हुईं या किस-किसने गलती की है। ऐसे में सभी सफल अभ्यर्थियों को नौकरी से हटाना कतई उचित नहीं है।
- तत्काल जॉइनिंग के आदेश: हाई कोर्ट ने 11वीं से 13वीं JPSC के सफल अभ्यर्थियों और फूड सेफ्टी ऑफिसर (Food Safety Officer) के पदों पर चयनित अभ्यर्थियों को तत्काल प्रभाव से योगदान (Join) कराने का आदेश दिया है।
- जवाब तलब: अदालत ने राज्य सरकार को मामले पर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को तय की गई है, तब तक रद्द करने के सरकारी आदेश पर रोक प्रभावी रहेगी।
अभ्यर्थियों के लिए क्या हैं इस फैसले के मायने?
- नियुक्ति प्रक्रिया पर लगा विराम हटा: जब तक हाई कोर्ट का कोई अंतिम फैसला नहीं आ जाता, राज्य सरकार अपनी रद्द करने की कार्रवाई पर आगे नहीं बढ़ सकेगी।
- आंदोलन के दबाव में फैसले पर लगाम: याचिकर्ताओं की इस दलील को बल मिला कि सरकार ने बिना विस्तृत जांच के केवल आंदोलन या राजनीतिक दबाव में आकर चयनित युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाला निर्णय लिया था।
- रोजगार की उम्मीदें बहाल: विशेष रूप से JPSC और खाद्य सुरक्षा अधिकारी भर्ती के चयनित उम्मीदवारों के लिए लंबे समय से अटका जॉइनिंग लेटर पाने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।





