वाशिंगटन / नई दिल्ली
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की विशाल और सुव्यवस्थित चुनावी प्रक्रिया की खुलकर सराहना करते हुए अमेरिका में मतदाता पहचान पत्र (वोटर आईडी) अनिवार्य करने की वकालत की है। ट्रंप ने भारतीय चुनाव प्रणाली को एक मिसाल के रूप में पेश करते हुए कहा कि जब 60 करोड़ से अधिक मतदाताओं वाला देश सख्त फोटो आईडी नियमों के साथ चुनाव करा सकता है, तो अमेरिका क्यों नहीं।
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' (Truth Social) पर एक पोस्ट के जरिए भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के साथ हुई अपनी हालिया बातचीत का भी जिक्र किया।
"बिना फोटो आईडी के चुनाव कैसे?" — ट्रंप का सवाल
ट्रंप के अनुसार, भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अमेरिकी प्रशासन से चर्चा के दौरान यह सवाल उठाया था कि बिना वैध फोटो पहचान पत्र के अमेरिका में निष्पक्ष चुनाव कैसे आयोजित किए जा सकते हैं?
डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के बीते आम चुनावों के आंकड़े साझा करते हुए लिखा:
- विशाल भागीदारी: भारत में 64.6 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।
- पारदर्शी प्रक्रिया: 1% से भी कम मतदाताओं ने डाक (मैल-इन बैलेट) से वोट डाला, जबकि हर मतदाता के लिए वैध फोटो आईडी अनिवार्य थी।
- सुरक्षित व्यवस्था: भारत की इस पारदर्शी व्यवस्था से अमेरिकी चुनावी तंत्र को सीख लेनी चाहिए।
'सेव अमेरिका एक्ट' पास करने की अपील
भारत के मॉडल को आधार बनाते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी कांग्रेस से जल्द से जल्द 'सेव अमेरिका एक्ट' (SAVE America Act) पारित करने का आग्रह किया। इस कानून का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी संघीय चुनावों में मतदाता पहचान पत्र और नागरिकता के प्रमाण को अनिवार्य बनाना है, ताकि गैर-नागरिक वोट न डाल सकें।
व्हाइट हाउस ने बायोमेट्रिक मॉडल को सराहा
व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि भारत और ब्राजील जैसे बड़े लोकतंत्रों में मतदाता पहचान पत्रों को बायोमेट्रिक डेटा से जोड़ा जाता है, जिससे फर्जीवाड़े की गुंजाइश खत्म हो जाती है। इसके विपरीत, अमेरिका आज भी मुख्य रूप से नागरिकता के लिए स्व-घोषणा (Self-declaration) पर निर्भर है।
ट्रंप प्रशासन का मानना है कि भारत जैसी पारदर्शी प्रणाली अपनाने से अमेरिका में चुनावी सुरक्षा और विश्वसनीयता को काफी मजबूती मिलेगी।





