अमेरिका और उत्तर अमरीकी पड़ोसी देश कनाडा के बीच महीनों से जारी द्विपक्षीय व्यापार वार्ता अंततः बेनतीजा खत्म हो गई है। समझौते के मुहाने पर पहुंचकर बातचीत टूटने के बाद अमेरिका ने कनाडा के करीब 20 अरब डॉलर मूल्य के उत्पादों पर 50 प्रतिशत का भारी-भरकम टैरिफ लागू कर दिया है। इस कठोर कदम ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक युद्ध (Trade War) की आशंकाओं को जन्म दे दिया है।

आरोप और प्रत्यारोप का दौर

  • कनाडा का रुख: प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिका पर अंतिम समय में अनुचित शर्तें थोपने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रशासन का यह रवैया किसी भी संधि की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है। कार्नी ने स्पष्ट किया कि कनाडा अपने उद्योगों और श्रमिकों की सुरक्षा के लिए इस टैरिफ का "डॉलर के बदले डॉलर" के हिसाब से बराबर का कर लगाकर करारा जवाब देगा।
  • अमेरिका का दावा: अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जैमीसन ग्रीर के अनुसार, अमेरिका ने कनाडा को किसी भी अन्य निर्यातक देश की तुलना में सबसे अनुकूल शर्तें ऑफर की थीं। हालांकि, कनाडा अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हुआ और बनी-बनाई सहमति से मुकर गया।
पहलूविवरण
द्विपक्षीय व्यापार का आकारलगभग $880 अरब डॉलर सालाना (2025 का आंकड़ा)
प्रस्तावित टैरिफ दरकनाडाई सामानों पर 50% सीमा शुल्क
प्रभावित आयात मूल्यकरीब $20 अरब डॉलर (कनाडा के कुल अमरीकी निर्यात का ~5%)
जवाबी रणनीतिकनाडा द्वारा अमरीकी सामानों पर "डॉलर के बदले डॉलर" टैरिफ की घोषणा

उत्पादों पर व्यापक असर और आर्थिक नुकसान

अमेरिका द्वारा लगाए गए इस 50% सीमा शुल्क का असर केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा प्रभाव दोनों देशों के आम नागरिकों की जेब पर पड़ेगा। निर्यात होने वाली रोजमर्रा की वस्तुओं, खेल सामग्री (जैसे हॉकी स्टिक), शराब, डेयरी उत्पादों से लेकर लकड़ी की जीभ जांचने वाली पट्टियों (Tongue Depressors) जैसे आवश्यक मेडिकल उपकरणों की कीमतें काफी बढ़ जाएंगी। आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने से उत्तरी अमेरिकी बाजार में अनिश्चितता का माहौल बन गया है।