भोपाल:
राजधानी भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित ‘कृषि इनोवेशन संवाद’ कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग की मौजूदगी में युवाओं और छात्रों के साथ सीधा संवाद किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अपने छात्र जीवन और किसान परिवार से जुड़े अपने जमीनी अनुभवों को साझा किया, साथ ही कृषि क्षेत्र को आधुनिक, व्यावहारिक और अधिक लाभकारी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
"खेती करने का अलग ही आनंद है": सीएम का संस्मरण
छात्रों द्वारा किसान परिवार से जुड़ाव और खेती के अनुभवों पर पूछे गए प्रश्नों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा:
- संघर्ष और लगाव: "मैं खुद एक किसान परिवार से आता हूं। उज्जैन में हमारे खेत नदी के पास हुआ करते थे। बारिश के दिनों में बेल के साथ पानी में तैरकर खेत तक जाना पड़ता था। पुराने समय में बिजली के तार खींचकर सिंचाई की व्यवस्था की जाती थी, जबकि आज स्थितियां काफी बदल चुकी हैं और सरकार हर खेत तक पानी पहुंचा रही है।"
- शिक्षा नीति में बदलाव: मुख्यमंत्री ने बताया कि जब वे शिक्षा मंत्री थे, तब उन्होंने कृषि शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए नई शिक्षा नीति में कृषि विषय को जोड़ने की छूट दी, ताकि युवाओं का जुड़ाव जमीन और खेती से बना रहे।
आय बढ़ाने के लिए अन्य व्यवसायों को अपनाने की सलाह
सीएम डॉ. यादव ने युवाओं से अपील की कि वे खेती को केवल एक पारंपरिक काम न मानकर इसे एक आधुनिक व्यवसाय के रूप में अपनाएं:
- विविधीकरण (Diversification): किसानों को पारंपरिक फसलों के अलावा मोती की खेती, मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन और शहद उत्पादन जैसे क्षेत्रों में कदम बढ़ाना चाहिए, जिससे लाखों रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित की जा सकती है।
- फूड प्रोसेसिंग: कृषि उपज का मूल्य संवर्धन करने के लिए फूड प्रोसेसिंग और इससे जुड़े अन्य संबंधित व्यवसायों को अपनाने की जरूरत पर बल दिया।
किसानों के हित में उठाए जा रहे कदम
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार ने वर्तमान वर्ष को ‘कृषि कल्याण वर्ष’ के रूप में घोषित किया है।
- राज्य सरकार किसानों की उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद रही है और हर साल बोनस भी दे रही है।
- मध्य प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य है जिसने किसानों को फसलों के उचित दाम दिलाने के लिए 'भावांतर योजना' को सफलतापूर्वक लागू किया।





