नियामे
पश्चिम अफ्रीकी देश नाइजर की राजधानी नियामे शनिवार तड़के गोलियों की तड़तड़ाहट और जोरदार धमाकों से दहल उठी। बागी सैनिकों ने तख्तापलट की नीयत से देश के सबसे अति-संवेदनशील ठिकानों—राष्ट्रपति भवन और अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट—पर अचानक हमला कर दिया। कई घंटों तक चली भीषण गोलीबारी के दौरान सरकारी टीवी और रेडियो का प्रसारण पूरी तरह ठप हो गया, जिससे पूरे देश में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
हालाँकि, साहेल राज्यों के गठबंधन (AES) और नाइजर रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि वफादार सैन्य बलों ने तत्परता दिखाते हुए विद्रोह की इस कोशिश को नाकाम कर दिया है और संवेदनशील ठिकानों पर फिर से नियंत्रण हासिल कर लिया है।
हमले की मुख्य बातें और सुरक्षा की स्थिति
- अति-सुरक्षा वाले क्षेत्रों में सेंध: विद्रोहियों ने नियामे स्थित एक सैन्य बेस से बाहर निकलकर तड़के ही राष्ट्रपति भवन और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को निशाना बनाया।
- विदेशी सैन्य बेस के पास धमाके: जिस मिलिट्री एयरबेस और एयरपोर्ट पर हमला हुआ, वहां रूसी और इतालवी सेना की टुकड़ियां तैनात हैं। सुबह होने से पहले इस इलाके में कई भारी धमाके सुने गए।
- नियंत्रण की जंग: सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, वफादार सैनिकों ने सुबह तक राष्ट्रपति भवन को सुरक्षित कर लिया था, लेकिन दोपहर तक एयरपोर्ट और एयरबेस के आसपास बागी सैनिकों के साथ मुठभेड़ जारी रही।
- साथियों को छुड़ाने का प्रयास: रक्षा मंत्रालय के बयान के मुताबिक, बागी सैनिकों ने मिलिट्री एयरबेस में हिरासत में लिए गए अपने कुछ साथियों को छुड़ाने की कोशिश की थी।
यूरेनियम समृद्ध देश में फिर मंडराया संकट
यह हमला जनरल अब्दौराहमाने टियानी के शासन के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है। टियानी ने जुलाई 2023 में लोकतांत्रिक रूप से चुने गए राष्ट्रपति मोहम्मद बजौम का तख्तापलट कर सत्ता हथिया ली थी।
तख्तापलट का आधार: टियानी ने देश में यूरेनियम, तेल और सोने के विशाल भंडारों की सुरक्षा तथा अल-कायदा व इस्लामिक स्टेट जैसे चरमपंथी संगठनों को खत्म करने का वादा किया था। हालांकि, माली और बुर्किना फासो की तरह नाइजर की सैन्य सरकार भी जिहादी हमलों को रोकने में काफी हद तक विफल साबित हुई है।
शुरुआत में कयास लगाए जा रहे थे कि यह हमला चरमपंथी इस्लामी आतंकियों का हो सकता है, क्योंकि इस साल के प्रारंभ में अल-कायदा से जुड़े समूहों ने एयरबेस पर हमला किया था। लेकिन बाद में स्पष्ट हुआ कि यह सेना के भीतर से ही उठा एक आंतरिक विद्रोह था।
फिलहाल, नाइजर सरकार का दावा है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और विद्रोहियों से वार्ता तथा सैन्य बल दोनों माध्यमों से निपटा जा रहा है।





