काठमांडू/कोलकाता। नेपाल और तिब्बत सीमा पर आई भीषण अचानक बाढ़ (Flash Flood) ने कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्रियों पर भारी तबाही बरपाई है। इस आपदा में आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु के ईशा फाउंडेशन के कम से कम 77 तीर्थयात्री लापता हो गए हैं। इसके अलावा, कोलकाता से गया एक 32 सदस्यीय दल भी बाढ़ के बाद से संपर्क से बाहर है।

नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से कुल 384 लोग लापता हैं, जिनमें 291 विदेशी और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं।

ग्यिरोंग आव्रजन कार्यालय में आई विशाल लहर

सद्गुरु ने एक ऑनलाइन पोस्ट और वीडियो साझा करते हुए इस घटना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ईशा फाउंडेशन का दल तिब्बत के कैलाश मानसरोवर से लौटते समय सीमा पर स्थित ग्यिरोंग (तिब्बत) के आव्रजन कार्यालय में मौजूद था। तभी भोटे कोशी नदी में आई प्रचंड बाढ़ और विशाल लहरों ने पूरे आव्रजन भवन को जलमग्न कर दिया।

  • ईशा फाउंडेशन का अपडेट: सद्गुरु ने बताया कि उनकी यात्रा के 21 समूहों में से 495 लोग सुरक्षित लौट चुके हैं, जबकि 743 लोग तिब्बत में और 148 नेपाल में हैं।
  • बचाव के लिए तैयार: सद्गुरु ने कहा, "हमारी टीम अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर मौके पर पहुंचने की कोशिश कर रही है। हम हर जोखिम उठाकर बचाव प्रयासों में शामिल होने के लिए तैयार हैं।"

कोलकाता के 32 तीर्थयात्री भी लापता

21 अगस्त को कोलकाता से रवाना हुआ 30 पर्यटकों और दो टूर मैनेजरों (जयंता सान्याल और नृपेन सरकार) का समूह भी इस बाढ़ की चपेट में आ गया। बुधवार सुबह करीब 8:30 बजे रसुवागढ़ी के पास आव्रजन प्रक्रिया के दौरान आए जलप्रलय के बाद से इस दल से कोई संपर्क नहीं हो सका है। ट्रैवल एजेंसी सम्राट ट्रैवल्स ने प्रभावित इलाके में खोजबीन के लिए हेलीकॉप्टर तैनात किया है।

पश्चिम बंगाल सरकार ने जारी की हेल्पलाइन

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार भारतीय दूतावास और नेपाल के स्थानीय अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है। परिजनों की सहायता के लिए पुलिस मुख्यालय (भवानी भवन) में हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं:

  • हेल्पलाइन नंबर: (033) 24793311 | 9147890181

बाढ़ से बुनियादी ढांचा पूरी तरह नष्ट हो जाने के कारण क्षेत्र में नेटवर्क और जमीनी संपर्क ठप है, जिससे राहत व बचाव कार्यों में भारी बाधा आ रही है।