पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाता सूची से नाम काटे जाने के मुद्दे पर देश की सर्वोच्च अदालत में कानूनी घमासान छिड़ गया है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल बागची की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान यह सवाल तेजी से उभरा कि क्या इस गड़बड़ी के आधार पर सुप्रीम कोर्ट राज्य में दोबारा विधानसभा चुनाव कराने का आदेश दे सकता है?
SIR डेटा और विवाद के 5 मुख्य बिंदु:
- 90% फैसले मतदाताओं के पक्ष में: वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने ट्रिब्यूनल का डेटा पेश करते हुए बताया कि अब तक 83 हजार मामलों का निपटारा हुआ है, जिनमें से लगभग 75 हजार (90%) मामलों में नाम काटने के फैसले को गलत पाया गया है।
- 38 लाख केस लंबित: बंगाल में SIR से जुड़े कुल 38 लाख मामले दर्ज हैं। इनमें से 31 लाख याचिकाएं नाम कटवाने के विरोध में दायर की गई हैं, जो पूरे चुनाव परिणाम को प्रभावित करने का माद्दा रखती हैं।
- हार-जीत का अंतर और कटे वोट: टीएमसी सांसद व वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी के अनुसार, बाली, हेमताबाद और सतगछिया जैसी 31 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां उम्मीदवारों की जीत का मार्जिन SIR में काटे गए वोटों की संख्या से भी कम है।
- वोट मार्जिन का गणित: हालिया चुनाव में बीजेपी को 2.93 करोड़ और टीएमसी को 2.60 करोड़ वोट मिले (अंतर 33 लाख)। चूंकि SIR से प्रभावित कुल नाम 38 लाख हैं, इसलिए यह आंकड़ा चुनावी नतीजों का रुख मोड़ने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है।
- अदालत की गंभीर टिप्पणी: जस्टिस जॉयमाल बागची ने टिप्पणी की कि यदि किसी सीट पर जीत का अंतर 50 वोट हो और वहां 100 लोगों के नाम गलत तरीके से काटे गए हों, तो यह अत्यंत गंभीर स्थिति है।
क्या सुप्रीम कोर्ट दे सकता है दोबारा चुनाव का आदेश?
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट रूप से पूछा, "क्या यह अदालत नए सिरे से चुनाव कराने का निर्देश दे सकती है?" हालांकि उन्होंने याचिकाकर्ता को इसके लिए औपचारिक आवेदन दाखिल करने का निर्देश दिया है।
संवैधानिक स्थिति:
- अनुच्छेद 324: चुनाव कराने और उसकी प्रक्रिया का पूरा अधिकार केवल निर्वाचन आयोग (Election Commission) के पास है।
- अनुच्छेद 356: सरकार को भंग कर राष्ट्रपति शासन लगाने का अधिकार राज्यपाल की सिफारिश पर राष्ट्रपति को है।
- अनुच्छेद 142: सुप्रीम कोर्ट के पास 'पूर्ण न्याय' (Complete Justice) करने की विशेष शक्ति है, जिसके तहत वह कोई भी अभूतपूर्व आदेश जारी कर सकता है। हालांकि, चुनाव रद्द कर दोबारा कराने का ऐसा फैसला इतिहास में कभी नहीं लिया गया है।
मामले का पृष्ठभूमि संदर्भ वर्ष 2026 के बंगाल विधानसभा चुनावों से पूर्व चुनाव आयोग ने SIR अभियान चलाया था। टीएमसी ने आरोप लगाया था कि सुनियोजित तरीके से उनके समर्थकों के नाम सूची से हटाए गए। चुनाव परिणामों में 294 सीटों में से बीजेपी ने 207 सीटें जीतकर सरकार बनाई, जबकि टीएमसी 80 सीटों पर सिमट गई थी। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को पूरे मामले का विस्तृत डेटा दाखिल करने का निर्देश दिया है।





