ढाका/नई दिल्ली। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा और नफ़रत का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी कड़ी में भारत विरोधी उकसावे और कट्टरपंथी गतिविधियों के लिए कुख्यात बांग्लादेशी देवबंदी मौलवी और आतंकी नेता मुफ्ती हारून बिन इजहार (हारून इजहार) ने एक बार फिर जहरीला बयान देकर माहौल तनावपूर्ण बना दिया है।
चटगांव में 'दावा मूवमेंट' के एक कार्यक्रम के दौरान हारून इजहार ने हिंदुओं को खुलेआम धमकी देते हुए कहा कि "हिंदुओं को आसानी से मारा जा सकता है और इसके लिए उसे खुद कुछ करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि उसके लोग ही इसके लिए काफी हैं।" इस धमकी भरा वीडियो सामने आने के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
कौन है हारून इजहार?
हारून इजहार कट्टरपंथी इस्लामी समूह हेफाजत-ए-इस्लाम से जुड़ा एक वरिष्ठ नेता है और धर्मगुरु मुफ्ती इजहारुल इस्लाम का बेटा है। वह अल-कायदा से जुड़े नेटवर्क का समर्थन करने और भड़काऊ बयानों के लिए जाना जाता है। उसकी हालिया गतिविधियों ने भारत, बांग्लादेश और पूरे दक्षिण एशिया की खुफिया एजेंसियों को अलर्ट पर रख दिया है।
UNSC की रिपोर्ट में अल-कायदा के बढ़ते कदमों पर चेतावनी
हारून इजहार की यह धमकी ऐसे समय में आई है जब हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की मॉनिटरिंग टीम ने बांग्लादेश में अल-कायदा (AQIS) के बढ़ते नेटवर्क को लेकर गंभीर चिंता जताई थी।
- रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा (AQIS) एक बिखरे हुए समूह से बदलकर एक बड़े क्षेत्रीय आतंकवादी नेटवर्क के रूप में उभर रहा है।
- यह संगठन अब बड़े दस्तों के बजाय छोटी और गुप्त इकाइयों के जरिए अपनी पैठ बना रहा है।
भारत ने जाहिर की सख्त चिंता
बांग्लादेश में पनपते अल-कायदा के तत्वों और हिंदुओं पर बढ़ते खतरे को लेकर भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा:
"आतंकवाद और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे केवल किसी एक देश के लिए नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए चिंता का विषय हैं। इस चुनौती से सभी देशों को मिलकर निपटने की ज़रूरत है।"
विदेश मंत्रालय ने UNSC की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इसमें अल-कायदा से जुड़े आतंकियों और उनके लाल किले के पास हुए 'रेड-4' आतंकी हमलों से जुड़े कनेक्शन का भी जिक्र है। भारत का साफ मानना है कि सीमा पार फल-फूल रहे इस आतंकी नेटवर्क पर लगाम लगाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़े कदम उठाने अनिवार्य हैं।





