दरभंगा (विशेष संवाद सूत्र):

बिहार में आगामी पंचायत चुनाव की दस्तक के साथ ही ग्रामीण इलाकों में राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुँच गई है। इस बार चुनावी चर्चा केवल आरक्षण तक सीमित न रहकर पंचायतों के संभावित परिसीमन पर आकर टिक गई है। राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर पंचायतों के पुनर्गठन की प्रक्रिया को मंजूरी मिलने के बाद संभावित उम्मीदवारों की धड़कनें तेज हो गई हैं।

आरक्षण से पहले सीमाओं पर टिकी निगाहें

दरभंगा जिले के केवटी प्रखंड में इस बार आरक्षण सूची से ज्यादा चर्चा परिसीमन को लेकर है। कौन-सा गांव किस पंचायत का हिस्सा बनेगा और कहाँ नई पंचायत आकार लेगी, इसे लेकर प्रखंड मुख्यालय से लेकर गांव की चौपालों तक कयासों का दौर जारी है। परिसीमन की संभावित तस्वीर जानने के लिए कई भावी प्रत्याशी प्रखंड मुख्यालय के चक्कर काट रहे हैं।

बढ़ सकती हैं चुनावी सीटें, नए दावेदारों को मिलेगा मौका

विशेषज्ञों के अनुसार, परिसीमन के बाद यदि पंचायतों का पुनर्गठन होता है और नई पंचायतें बनती हैं, तो विभिन्न पदों की संख्या में भी इजाफा होगा:

  • वर्तमान में केवटी की स्थिति: केवटी प्रखंड में अभी कुल 26 पंचायतें हैं।
  • मौजूदा पद: मुखिया व सरपंच के 26-26 पद, पंचायत समिति सदस्य के 36 पद, जिला परिषद सदस्य के 4 पद तथा वार्ड सदस्य एवं पंच के 355-355 पद हैं।
  • संभावित बदलाव: नई पंचायतें बनने पर मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति और वार्ड सदस्यों के नए पद सृजित होंगे, जिससे नए राजनीतिक चेहरों के लिए चुनावी मैदान खुल जाएगा।

सबसे बड़ी पंचायत 'कोठिया' पर खास नजर

केवटी प्रखंड की सबसे बड़ी पंचायत कोठिया है, जिसमें वर्तमान में सबसे ज्यादा 19 वार्ड हैं। इसके अलावा केवटी, लालगंज, मझिगामा, पैगंबरपुर और बरही पंचायतों में 16-16 वार्ड हैं।

जनसंख्या और भौगोलिक विस्तार को देखते हुए माना जा रहा है कि कोठिया पंचायत के पुनर्गठन की पूरी संभावना है और यहाँ से एक नई पंचायत का गठन हो सकता है।

स्थानीय प्रतिनिधियों का रुख

मुखिया संघ के प्रखंड अध्यक्ष सह रजौरा पंचायत के मुखिया इफ्तेखार अहमद उर्फ छोटन और लालगंज पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि राम नारायण यादव उर्फ चंदन यादव के मुताबिक, 2011 की जनगणना के आधार पर कई पंचायतों की आबादी में बड़ा अंतर आया है। सीमाओं के नए सिरे से निर्धारण के बाद केवटी प्रखंड के पुराने राजनीतिक समीकरण ध्वस्त होंगे और नए सियासी गठबंधन देखने को मिलेंगे।