पटना: बिहार सरकार ने राज्य प्रशासनिक सेवा और पुलिस महकमे के अधिकारियों के लिए जनप्रतिनिधियों (सांसदों और विधायकों) के प्रति शिष्टाचार और प्रोटोकॉल पालन को लेकर कड़े निर्देश जारी किए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी इस आदेश के तहत अब यदि कोई अधिकारी किसी विधायक या सांसद का फोन कॉल तुरंत नहीं उठा पाता है, तो उसे बाद में स्वयं कॉल बैक करके संवाद स्थापित करना अनिवार्य होगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनप्रतिनिधि जनता और शासन प्रणाली के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं, इसलिए उनके पद और गरिमा के अनुरूप ही व्यवहार किया जाना चाहिए।
दिशा-निर्देशों के मुख्य बिंदु
अधिकारियों के लिए तय की गई मुख्य जवाबदेहियां
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश में अफसरों के लिए निम्नलिखित मानक तय किए गए हैं:
- फोन का त्वरित जवाब: जनप्रतिनिधियों का फोन आने पर तत्काल बात करें। कॉल न उठा पाने की स्थिति में जल्द से जल्द कॉल बैक करें।
- पत्राचार पर समयबद्ध कार्रवाई: सांसदों और विधायकों से प्राप्त पत्रों की पावती (Acknowledge) तुरंत दें और उन पर की गई कार्रवाई या वर्तमान स्थिति की जानकारी निर्धारित समय सीमा के भीतर उपलब्ध कराएं।
- कार्यालय आगमन पर सम्मान: जब भी कोई विधायक या सांसद अधिकारी के दफ्तर पहुंचे, तो उनके पद और गरिमा के अनुरूप पूरा शिष्टाचार, सम्मानजनक व्यवहार और प्रोटोकॉल दिया जाए।
विधानसभा अध्यक्ष की बैठक के बाद फैसला
सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव मोहम्मद सोहैल की ओर से यह पत्र सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP), सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और जिलाधिकारियों (DM) को भेजा गया है।
इस आदेश की पृष्ठभूमि 17 जुलाई 2026 को बिहार विधानसभा अध्यक्ष की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक से जुड़ी है। बैठक में विधायकों के प्रति अपेक्षित प्रोटोकॉल के प्रभावी अनुपालन पर चिंता व्यक्त की गई थी, जिसके बाद सरकार ने यह सख्त रुख अपनाया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इन नियमों की अनदेखी पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
जनता और व्यवस्था की अहम कड़ी हैं जनप्रतिनिधि
सरकार ने अधिकारियों को याद दिलाया है कि जनप्रतिनिधि आम जनता और सरकारी व्यवस्था के बीच एक मजबूत व अहम माध्यम हैं। इसलिए उनके प्रति किसी भी प्रकार की लापरवाही या दुर्व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पहले जारी किए गए पत्रों का हवाला देते हुए शासन ने स्पष्ट कर दिया है कि इन निर्देशों का उल्लंघन करने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।





