नई दिल्ली: 80वें स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से 13वीं बार देश को संबोधित किया। अपने इस संबोधन में प्रधानमंत्री का मुख्य फोकस देश के युवाओं, विशेष रूप से 'जेन जी' (Gen Z) पर रहा। उन्होंने जहाँ एक ओर युवाओं को 'विकसित भारत' की रीढ़ बताते हुए नई योजनाओं की सौगात दी, वहीं दूसरी ओर देश को अंदर से कमजोर करने की कोशिश कर रहे 'दिमागी नक्सलियों' से सतर्क रहने की सख्त सलाह भी दी।
'हिंसक नक्सलवाद खत्म, अब दिमागी नक्सलियों से बचें युवा'
देश की आंतरिक सुरक्षा और युवाओं के मार्गदर्शन पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत से हिंसक नक्सलवाद का दौर अब समाप्ति की ओर है, लेकिन एक नया खतरा मंडरा रहा है।
"दिमागी नक्सल अब भी मौके की तलाश में हैं, वे नए-नए षड्यंत्र रच रहे हैं। हमें इन दिमागी नक्सलियों को पहचानना होगा। मैं देश के युवाओं से अपील करता हूँ कि वे इनके बहकावे में न आएं और राष्ट्र निर्माण में अपना सक्रिय योगदान दें।"
युवाओं के लिए दो बड़ी ऐतिहासिक घोषणाएँ
प्रधानमंत्री मोदी ने 'जेन जी' और 'जेन अल्फा' को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत देने के लिए दो बड़े संकल्पों का ऐलान किया:
- 1 करोड़ युवाओं को AI स्किल ट्रेनिंग: प्रधानमंत्री ने कहा कि अगले 1 साल के भीतर देश के 1 करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसका उद्देश्य भारत के युवाओं को एआई के क्षेत्र में विश्व का नेतृत्व करने के काबिल बनाना है।
- मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग योजना: गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर प्राइवेट कोचिंग सेंटरों के भारी आर्थिक बोझ को रेखांकित करते हुए PM ने घोषणा की कि सरकार विभिन्न कॉम्पिटेटिव एग्जाम्स (प्रतियोगी परीक्षाओं) की तैयारी के लिए फ्री ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराएगी, ताकि कोई भी प्रतिभाशाली युवा पैसों की कमी के कारण पीछे न छूटे।
सार-संक्षेप: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 13वाँ स्वतंत्रता दिवस संबोधन तकनीकी प्रगति, सशक्तिकरण और राष्ट्रीय जागरूकता का संगम रहा। एक तरफ जहाँ सरकार ने AI ट्रेनिंग और फ्री कोचिंग से युवाओं का भविष्य संवारने का खाका खींचा, वहीं दूसरी तरफ देश के युवाओं को वैचारिक षड्यंत्रों से दूर रहकर 'विकसित भारत 2047' के सपने को साकार करने का आह्वान किया।





