नई दिल्ली/काठमांडू। भोटे कोशी नदी में आई भीषण बाढ़ से रसुवा, धादिंग और नुवाकोट जिलों में हुई भयंकर तबाही के बीच भारत ने एक बार फिर पड़ोसी धर्म निभाते हुए नेपाल की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है। भारत ने न केवल तत्काल प्रभाव से 10 टन राहत सामग्री और आवश्यक चिकित्सा आपूर्ति भेजी है, बल्कि नेपाल के प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्यों के लिए अपनी टीमें भी तैनात की हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने जताया शोक, मदद का दिया भरोसा

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से टेलीफोन पर बात कर इस प्राकृतिक आपदा में हुई जनहानि पर गहरा दुख व्यक्त किया। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि इस संकट की घड़ी में भारत अपने पड़ोसी देश के साथ मजबूती से खड़ा है और हर संभव मानवीय सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने इस त्वरित सहयोग के लिए भारत का धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि संकट के समय भारत की यह एकजुटता दोनों देशों के ऐतिहासिक और गहरे दोस्ताना संबंधों का प्रतीक है।

विदेश मंत्रालय की त्वरित कार्रवाई

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जानकारी दी कि भारत द्वारा भेजी गई सहायता सामग्री की पहली खेप काठमांडू पहुंच चुकी है:

  • 10 टन राहत सामग्री: इसमें जरूरी दवाएं, मेडिकल उपकरण, शेल्टर किट और अन्य जीवनरक्षक सामग्रियां शामिल हैं।
  • संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन: भारतीय टीमें धरातल पर नेपाली अधिकारियों और सुरक्षा बलों के साथ मिलकर मलबे में दबे और फंसे लोगों को निकालने का काम कर रही हैं।
  • अतिरिक्त मदद की तैयारी: स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार ने और अधिक राहत सामग्री भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

वैश्विक समर्थन के बीच भारत की त्वरित पहल

यद्यपि अमेरिका, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, कनाडा और संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक मंचों ने भी नेपाल को समर्थन की पेशकश की है, लेकिन भारत की ओर से बिना किसी देरी के पहुंचाई गई सीधी जमीनी और चिकित्सकीय सहायता ने दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक व रणनीतिक रिश्तों को पुन: रेखांकित किया है।

तमाम हालिया कूटनीतिक उतार-चढ़ाव के बावजूद, इस त्वरित मानवीय सहायता ने स्पष्ट संदेश दिया है कि नेपाल की हर विषम परिस्थिति में भारत उसका पहला और विश्वसनीय साथी है।