नई दिल्ली। पश्चिम एशिया की राजनीति में सऊदी अरब की हालिया रणनीतिक चालों ने दुनिया भर के कूटनीतिज्ञों को चौंका दिया है। सऊदी अरब ने एक तरफ भारत के पारंपरिक विरोधियों—पाकिस्तान और तुर्किए—के साथ ऐतिहासिक 'मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट' किया है, वहीं दूसरी तरफ भारत के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में शामिल फ्रांस के साथ अरबों डॉलर की डील पर हस्ताक्षर किए हैं।

फ्रांस और सऊदी अरब के बीच रक्षा और ऊर्जा का बड़ा समझौता

24 अगस्त को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की फ्रांस यात्रा के दौरान पेरिस के एलिसी पैलेस में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ 'फ्रेंको-सऊदी स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप काउंसिल' की ऐतिहासिक बैठक हुई।

  • 21 समझौते: दोनों देशों ने रक्षा, ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), पर्यटन और स्वास्थ्य जैसे प्रमुख क्षेत्रों में 21 समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
  • वित्तीय ढांचा: लगभग 3.7 बिलियन डॉलर के खरीद समझौतों की घोषणा की गई, जबकि 5 बिलियन डॉलर की क्रेडिट लाइन की योजना बनाई गई है।
  • किद्दिआ प्रोजेक्ट: फ्रांस सऊदी अरब के महत्वाकांक्षी 'किद्दिआ मनोरंजन प्रोजेक्ट' में लगभग 7 बिलियन डॉलर के निवेश की संभावना तलाश रहा है।

यह समझौता सऊदी अरब के 'विजन 2030' के लक्ष्यों को गति देने के उद्देश्य से किया गया है।

क्या है पाकिस्तान और तुर्किए के साथ 'मक्का समझौता'?

फ्रांस डील से ठीक पहले सऊदी अरब ने मक्का में पाकिस्तान और तुर्किए के साथ मिलकर एक बड़ा रक्षा समझौता किया।

  • सामूहिक सुरक्षा शर्त:
  • 'मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट' की मुख्य शर्त यह है कि तीनों में से किसी भी एक देश पर होने वाले सशस्त्र हमले को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।
  • खुफिया साझेदारी: इसके तहत पाकिस्तान की ISI और सऊदी अरब की GID के बीच एक विशेष खुफिया सेल बनाने पर भी सहमति बनी है।

तीनों देशों के अपने रणनीतिक हित

  1. सऊदी अरब: मिडिल ईस्ट में इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका पर अपनी सुरक्षा निर्भरता कम करना चाहता है।
  2. पाकिस्तान: गंभीर आर्थिक बदहाली से उबरने के लिए सऊदी से भारी वित्तीय मदद और निवेश की उम्मीद में है।
  3. तुर्किए: रक्षा उत्पादन के लिए बड़ा बाजार और पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य भूमिका बढ़ाना चाहता है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर का सख्त रुख

सऊदी-पाक-तुर्किए गठबंधन पर भारत पूरी बारीकी से नजर बनाए हुए है। हाल ही में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत उन सभी देशों और उनकी गतिविधियों पर पैनी नजर रखता है, जो भारत के प्रति दोस्ताना रवैया नहीं रखते। उन्होंने तंज कसते हुए यह भी कहा कि इस समझौते को अंजाम देने वाले देश खुद कई तरह की गंभीर सैन्य चुनौतियों से जूझ रहे हैं।