नई दिल्ली। 'हॉर्न ऑफ अफ्रीका' और अदन की खाड़ी के पास अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर समुद्री डकैती का खतरा एक बार फिर गहरा गया है। यमन और सोमालिया के तट के पास दो अलग-अलग घटनाओं में समुद्री लुटेरों ने 22 भारतीय नागरिकों समेत दो वाणिज्यिक जहाजों को अपने कब्जे में ले लिया है। इन घटनाओं के बाद भारतीय नौवहन महानिदेशालय और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं।

दोनों अपहरण की घटनाओं का विवरण

  • यमन तट के पास M.T. Sibu 1 का अपहरण:
    • जहाज का विवरण: इरिट्रिया के झंडे वाला यह तेल उत्पाद टैंकर यमन के तट से करीब 30 समुद्री मील दूर अदन की खाड़ी से हाईजैक किया गया।
    • चालक दल: जहाज पर कुल 20 सदस्य सवार थे, जिनमें 16 भारतीय नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा सीरिया, सूडान और इराक के नाविक भी सवार हैं।
    • मौजूदा स्थिति: नौवहन महानिदेशालय की रिपोर्ट के अनुसार, सभी 20 सदस्य सुरक्षित बताए गए हैं, हालांकि ताजा अपडेट का इंतजार है।
  • सोमालिया के पुंटलैंड में M/V LUTUF पर कब्जा:
    • जहाज का विवरण: कैमरून के झंडे वाले इस मालवाहक जहाज को सोमालिया के पुंटलैंड स्थित ईयल जिले के पास से हाईजैक कर नूगाल तट की ओर ले जाया गया।
    • चालक दल व कार्गो: जहाज पर 6 भारतीयों समेत 10 सदस्य और 2 सर्बियाई सुरक्षा गार्ड शामिल हैं। यह जहाज तुर्की के सैन्य प्रशिक्षण केंद्र के लिए हथियार, संचार व सैटेलाइट उपकरण ले जा रहा था।

घटनाओं का तुलनात्मक विवरण

विवरण / विशेषताएंM.T. Sibu 1 (तेल टैंकर)M/V LUTUF (मालवाहक जहाज)
घटना स्थलयमन तट (अदन की खाड़ी)पुंटलैंड तट (सोमालिया)
भारतीय नाविक16 भारतीय6 भारतीय
कुल चालक दल20 सदस्य10 सदस्य (+ 2 गार्ड)
जहाज का झंडाइरिट्रियाकैमरून
संदिग्ध समूहअज्ञात समुद्री लुटेरे8 लुटेरे (पुराने गिरोह से संबद्ध)

नाविक यूनियन ने जारी किया पुराना वीडियो

इन घटनाओं के बीच 'फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया' (FSUI) ने 22 अप्रैल का एक वीडियो जारी कर तनावपूर्ण समुद्री क्षेत्रों में भारतीय नाविकों के सामने आने वाले खतरों को रेखांकित किया है। वीडियो में होर्मुज जलडमरूमध्य के पास पनामा के झंडे वाले एक कंटेनर जहाज को ईरानी नौकाओं द्वारा घेरे जाने और उस पर हुई गोलीबारी के दृश्य हैं, हालांकि उस घटना में सभी 21 भारतीय नाविक सुरक्षित बच गए थे।

सरकारी कार्रवाई: भारतीय नौवहन महानिदेशालय ने क्रू की भर्ती करने वाली लाइसेंसिंग एजेंसियों से रिपोर्ट मांगी है। विदेश मंत्रालय और नौसेना स्थिति पर करीब से नजर रख रहे हैं।