भोपाल: मध्य प्रदेश को देश का अग्रणि और समृद्ध राज्य बनाने की दिशा में राजधानी भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में एक महत्वपूर्ण राज्य स्तरीय कॉन्क्लेव आयोजित किया गया। "कंट्रीब्यूशन ऑफ सेंट्रली फंडेड इंस्टीट्यूशनंस फॉर समृद्ध मध्यप्रदेश @2047" विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में देशभर के केंद्रीय संस्थानों के विद्वानों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष राज्य के तेजी से विकास के लिए अपने सुझाव प्रस्तुत किए।

12 वर्षों में हुए परिवर्तन और सेमीकंडक्टर क्रांति

कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि भारत हर चुनौती का मुकाबला करने में पूरी तरह सक्षम है। पिछले 12 वर्षों में देश और प्रदेश में अभूतपूर्व और चमत्कारिक बदलाव आए हैं। उन्होंने कहा:

  • हाइ-टेक मैन्युफैक्चरिंग: मध्य प्रदेश में अब सेमीकंडक्टर यूनिट्स लग रही हैं, जिसकी कल्पना कुछ वर्ष पहले तक असंभव लगती थी।
  • समान अवसर: आज देश के सभी राज्यों के पास विकास के रास्ते पर आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध हैं।

वैश्विक उदाहरण और कृषि क्षेत्र की चुनौतियाँ

मुख्यमंत्री ने इजराइल और जापान के पुनरुत्थान का उदाहरण देते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों से निकलकर भी देश महान बनते हैं। भारत ने थल, जल और नभ में अपनी रक्षा क्षमताओं को सुदृढ़ किया है।

कृषि क्षेत्र पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि हमारा प्रदेश कृषि आधारित है, लेकिन आज युवाओं का खेती के प्रति रुझान कम होना एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने याद दिलाया कि 1956 में राज्य गठन से लेकर 2002-03 तक (लगभग 55 वर्षों में) केवल 7.5 लाख हेक्टेयर भूमि ही सिंचित हो सकी थी, जबकि आज स्थितियाँ तेजी से बदली हैं।

नदी जोड़ो अभियान (PKC योजना) से 15 जिलों को लाभ

जल प्रबंधन और सिंचाई विस्तार पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया:

  • पार्वती-कालीसिंध-चंबल (PKC) योजना: राजस्थान के साथ दो दशकों से चला आ रहा जल विवाद अब खत्म हो गया है। इस योजना से मध्य प्रदेश के 15 जिले और राजस्थान के 15 जिले लहलहा उठेंगे।
  • बाढ़ नियंत्रण: नदियाँ जुड़ने से अतिरिक्त पानी का सही प्रबंधन होगा और बाढ़ जैसी आपदाओं पर रोक लगेगी।

'समृद्ध मध्यप्रदेश @2047' और 2029 का पहला चेकपॉइंट कार्यक्रम में मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने विजन डॉक्यूमेंट के मुख्य पहलुओं को रेखांकित किया:

  • उत्पादक निवेश (Productive Investment): मध्य प्रदेश को केवल सामान्य इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट नहीं, बल्कि ऐसा प्रोडक्टिव इन्वेस्टमेंट चाहिए जो नेशनल वैल्यू चेन में राज्य की भागीदारी तय करे।
  • 2029 का लक्ष्य: 'समृद्ध मध्यप्रदेश @2047' के संकल्प में वर्ष 2029 को पहला प्रमुख चेकपॉइंट बनाया गया है।
  • सामूहिक भागीदारी: विकसित मध्य प्रदेश का निर्माण सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें नागरिक समाज, उद्यमियों और हर संस्थान का योगदान जरूरी है।