रांची।झारखंड में सरकारी स्कूल के शिक्षकों की गर्मी की छुट्टी में कटौती होगी।इस बार शिक्षकों को सिर्फ दो सप्ताह ही गर्मी की छुट्टियां मिल सकेंगी।जो शिक्षक उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन में लगे रहेंगे,उनको क्षतिपूर्ति अवकाश बाद में दिया जाएगा।स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग इसे निर्धारित करने की तैयारी में जुटा है।शिक्षकों को गर्मी की छुट्टीयां मई के तीसरे सप्ताह से मिल सकेंगी।





प्रारंभिक स्कूलों में सातवीं तक के बच्चों की 2 से 15 मई के बीच परीक्षा का आयोजन किया जाएगा और इसमें ऑब्जेक्टिव सवाल पूछे जाएंगे।इसी आधार पर बच्चों को अगली क्लास में भेजा जाएगा। 31 मार्च को 3 से 7वीं क्लास तक के बच्चों का स्कूलों में टेस्ट हुआ था। 3 और 4 क्लास के बच्चों को उत्तरपुस्तिका देकर ऑब्जेक्टिव सवाल पूछे गए थे,जबकि 5 से 7वीं तक के बच्चों की पुरानी ओएमआर शीट पर परीक्षा ली गई थी। अभी भी इसकी कॉपियों का मूल्यांकन जारी है। टीजीटी रोस्टर अभी तक 8 जिलों से मिला है। 16 जिलों ने अभी तक ये नहीं दिया है।इसमें रांची, लोहरदगा, गढ़वा, लातेहार, बोकारो, धनबाद, गिरिडीह, हजारीबाग, देवघर, दुमका, गोड्डा, जमताड़ा, पाकुड़, पूर्वी सिंहभूम शामिल हैं।इन जिलों को अविलंब रोस्टर उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।





मेधा छात्रवृत्ति के लिए 8वीं के बच्चों की जांच परीक्षा होगी।इस परीक्षा की तैयारी के लिए पूर्व के वर्षों में झारखंड एकेडमिक काउंसिल की ओर से ली गई परीक्षा के प्रश्नपत्र जैक के पोर्टल पर उपलब्ध कराया जा रहा है। जिला शिक्षा अधीक्षक इसे छात्र-छात्राओं तक उसे उपलब्ध कराएंगे, ताकि इसमें ज्यादा से ज्यादा छात्र-छात्रा शामिल हो सके।





सरकारी स्कूलों में बैक टू स्कूल कैंपेन चलाया जा रहा है। इसमें सभी छात्र-छात्राओं का नामांकन सुनिश्चित कराया जा रहा है और साथ ही बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित की जा रही है।स्कूलों में सप्ताह में एक दिन बिना पाठ्य पुस्तकों के ही छात्र-छात्राओं को पढ़ाना है और इसे कैसे संचालित करेंगे इसकी क्या रूपरेखा होगी,सभी कार्यक्रम तैयार कर उपलब्ध कराएंगे। इसके अलावा स्कूल से बाहर रह गए बच्चों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें गोड्डा, हजारीबाग और रांची के सर्वेक्षण का काम अपेक्षाकृत काफी कम हुआ है। इसमें जिलों को निर्देश दिया गया है कि जिन शिक्षकों द्वारा सर्वेक्षण का काम पूरा नहीं किया गया है उनका वेतन रोक दिया जाए।





सरकारी स्कूल के बच्चों के स्पॉट टेस्ट की गति धीमी है। हर रोज बहुत ही कम स्पॉट टेस्ट हो रहा है।इस पर स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग ने असंतोष जताया है। जिलों से कहा गया है कि किसी बीआरपी-सीआरपी को कितने स्कूल आवंटित हैं और उसके अनुसार कितने स्पॉट किया जाना है व कितना किया जा रहा है, उसकी समीक्ष कर रिपोर्ट दें। जो बीआरपी-सीआरपी इसमें रुचि नहीं ले रहे हैं, उन पर कार्रवाई की जाए।