सोने और चांदी पर आयात शुल्क (Import Duty) बढ़ाकर आयात पर रोक लगाने का केंद्र सरकार का फैसला उम्मीद के मुताबिक प्रभावी साबित नहीं हुआ है। टैक्स दरों में बढ़ोतरी के बावजूद देश में सोने की कुल मांग पर असर नहीं पड़ा, बल्कि अवैध व्यापार और तस्करी (Gray Market) में भारी इजाफा हो गया। इस स्थिति को देखते हुए सरकार अब सोने-चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती करने पर गंभीरता से विचार कर रही है।
जेम्स एंड ज्वेलरी काउंसिल और बाजार की स्थिति:
- नीति हुई बेअसर: ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल (GJC) के चेयरमैन राजेश रोकड़े के अनुसार, उच्च टैक्स दरों के कारण वैध आयात घटने के बजाय ग्रे मार्केट का दायरा तेजी से बढ़ा है। लोग भारी टैक्स से बचने के लिए अवैध रास्तों का सहारा ले रहे हैं।
- मई 2026 में बढ़ी थी ड्यूटी: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने के उद्देश्य से सरकार ने मई 2026 में सोने-चांदी पर कस्टम ड्यूटी को 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया था।
- सही समय का इंतजार: रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार इस टैक्स व्यवस्था में समीक्षा करने और ड्यूटी घटाने के लिए सही समय का इंतजार कर रही है।
भारत में सोने का आयात और बाजार दर:
- आयात का रिकॉर्ड आंकड़ा: चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्वर्ण उपभोक्ता देश है। वित्त वर्ष 2026 में मूल्य के हिसाब से सोने का आयात 24 प्रतिशत बढ़कर 71.9 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, हालांकि मात्रा के आधार पर यह घटकर 721 टन रहा।
- कीमतों में आज नरमी: इंपोर्ट ड्यूटी घटाने की चर्चाओं के बीच स्पॉट डिमांड कमजोर पड़ने से वायदा बाजार (Future Trade) में सोने के दाम 2,045 रुपये टूटकर 1,54,236 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गए हैं।





