वाराणसी। धर्म नगरी काशी में विचारक तथा सलाहकार पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने अजान औऱ हनुमान चालीसा को लेकर उठे विवाद पर दोनों पक्षों पर टिप्पणी की है।उन्होंने टिप्पणी करते हुए पूछा कि संविधान में यह कहां लिखा है कि पांच वक्त की नमाज के बदले पांच वक्त की हनुमान चालीसा पढ़ी जाए।ये सब कर के धर्म की आड़ में राजनीतिक लाभ क्यों उठाया जा रहा है।भारत में संविधान ही सर्वोपरि है और संविधान से बढ़कर कुछ भी नहीं है।इसलिए इस तरह की पागलपंती करना बंद कर दें।धर्म के साथ खिलवाड़ कतई उचित नहीं है।





पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने कहा कि मैं राजनीतिक आदमी नहीं हूं, फिर भी यह बात कहना चाहता हूं कि यदि कोई अजान कर रहा है तो आप उसके जवाब में हनुमान चालीसा क्यों बजा रहे हैं। इसके पहले क्यों नहीं हनुमान चालीसा बजा रहे थे।यदि आपके अंदर हनुमान जी की भक्ति है तो पहले क्यों नहीं आपने ये किया,आपकी आस्था और धर्म पहले कहां थी। उन्होंने ने कहा कि एक पागलपन कर रहा है तो आप क्यों करेंगे।आप हिंदुओं की आस्था और परंपरा का इस्तेमाल करके राजनीतिक लाभ क्यों उठा रहे हैं।







पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने कहा कि यदि कल अजान बन्द हो जाएगी तो इसका मतलब आप भी हनुमान चालीसा बन्द कर देंगे,आपको हनुमान चालीसा करनी है तो कीजिए लेकिन अजान के जवाब में हिंदुओं की आस्था को राजनीतिक शक्ल क्यों दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि संवैधानिक तौर पर पांच वक्त की अजान गलत है लेकिन हिंदुओं के भी धर्म में ये कहीं नहीं लिखा है कि पांच वक्त की हनुमान चालीसा पढ़ी जाए।आप हनुमान जी के भक्त हैं तो यह तय करें कि मंगलवार के दिन एक घण्टे के लिए हनुमान चालीसा बजाया जाए, लेकिन किसी को जवाब देने के लिए पागलपन करना ठीक नहीं है। न इस्लामिक धर्म के हिसाब से,न ही हिन्दू धर्म के हिसाब से।







पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने मुस्लिमों को नसीहत देते हुए कहा कि 1400 साल साल पहले जब अजान नहीं था और जब माननीय कोर्ट ने एक समय सीमा देकर उस समय किसी भी धार्मिक स्थल पर लाउडस्पीकर बजाने पर रोक लगाया,आप उसे भी नहीं मानते।इस्लाम की उत्पत्ति से आज तक इस्लाम से दुनिया को डराने की कोशिश की जा रही है।







पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने कहा कि 1400 साल पहले की बात समझ में आती है कि उस समय अजान देकर लोगों को नमाज के लिए बुलाया जाता था।अजान को एक तरह से इस्लामिक हथियार बना लिया गया है,जिसकी आड़ में गुंडागर्दी किया की जाती है।भारत में संविधान सर्वोपरि है।आपका तथाकथित किताब कुरान क्या कहता है ये आपका पर्सनल मैटर है।कोर्ट के आदेश के बाद आप संविधान को भी नहीं मानेंगे और तथाकथित अपने कुरान का भी नहीं मानेंगे।