नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन संघर्ष और ईरान-इज़राइल तनाव के बीच अपनी रक्षा तैयारियों को अभेद्य बनाने के उद्देश्य से भारत हिंद महासागर क्षेत्र में एक और बड़े मिसाइल परीक्षण की तैयारी कर रहा है। भारत सरकार ने 2 और 3 सितंबर 2026 के लिए हिंद महासागर में 2,995 किलोमीटर लंबे नो-फ्लाई/नो-सेल ज़ोन के लिए 'नोटिस टू एयरमेन' (NOTAM) जारी किया है। इस कदम से चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों की चिंताएं बढ़ना लाज़मी है।
किस मिसाइल के परीक्षण की है संभावना?
रक्षा मंत्रालय द्वारा परीक्षण किए जाने वाले मिसाइल के नाम की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है, लेकिन तकनीकी मापदंडों के आधार पर संभावनाएं इस प्रकार हैं:
- अग्नि-3 या अग्नि-4: 2,995 किलोमीटर का NOTAM गलियारा मुख्य रूप से अग्नि-3 (रेंज: 3,000-5,000 किमी) और अग्नि-4 (रेंज: लगभग 4,000 किमी) जैसी मध्यम/इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलों के यूजर ट्रायल या गाइडेंस सिस्टम के अपग्रेडेशन परीक्षण से मेल खाता है।
- तकनीकी सुधार का परीक्षण: अगस्त 2026 में भी 2,530 किमी के NOTAM के तहत अग्नि-4 का सफल परीक्षण हुआ था। ऐसे में यह परीक्षण मिसाइल की सटीकता, री-एंट्री तकनीक और विश्वसनीयता को परखने के लिए हो सकता है।
- अग्नि-6 (ICBM) की चर्चा: यद्यपि NOTAM की लंबाई अग्नि-6 की पूर्ण क्षमता से कम है, फिर भी अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) अग्नि-6 के शुरुआती परीक्षणों को लेकर अटकलें तेज़ हैं।
प्रमुख अग्नि मिसाइलों की मारक क्षमता व विशेषताएं
| मिसाइल प्रणाली | संभावित मारक क्षमता (Range) | मुख्य विशेषताएं |
| अग्नि-3 | 3,000 से 5,000 किमी | जून 2011 से सेना में शामिल; ठोस ईंधन आधारित। |
| अग्नि-4 | लगभग 4,000 किमी | टू-स्टेज सॉलिड प्रोपेलेंट; आधुनिक एवियोनिक्स प्रणाली। |
| अग्नि-6 (प्रस्तावित) | 8,000 से 10,000+ किमी | 4-स्टेज मिसाइल; MIRV तकनीक (10-12 स्वतंत्र वॉरहेड ले जाने में सक्षम)। |
रणनीतिक महत्व और MIRV तकनीक
यह मिसाइल परीक्षण ओडिशा के तट पर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप (चांदीपुर/धामरा) से किए जाने की उम्मीद है। भारत की परमाणु नीति में 'क्रेडिबल मिनिमम डिटेरेंस' (विश्वसनीय न्यूनतम निवारण) और 'नो फर्स्ट यूज़' (पहले उपयोग न करना) के तहत एक मजबूत 'सेकंड स्ट्राइक कैपेबिलिटी' (जवाबी हमले की क्षमता) बेहद अहम है।
हाल के वर्षों में मार्च 2024 के 'मिशन दिव्यास्त्र' और मई 2026 में हुए MIRV (Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicle) परीक्षणों के बाद, आगामी परीक्षण को भारत की रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता को वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।





