नई दिल्ली (विशेष रिपोर्ट):

भारत की Gen Z पीढ़ी (1997 से 2012 के बीच जन्मे युवा) आज के भारतीय बाजार की सबसे बड़ी आर्थिक ताकत बनकर उभरी है। यह एक ऐसी पीढ़ी है जो न तो पारंपरिक ब्रांड्स के पीछे भागती है और न ही किसी का इंतजार करती है। यह अपनी शर्तों पर खरीदारी करती है, अपनी मर्जी से खर्च करती है और खुद मार्केट का ट्रेंड तय करती है।

हालांकि, सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा यह है कि 45% ब्रांड्स Gen Z की अहमियत को स्वीकार तो करते हैं, लेकिन केवल 15% ब्रांड्स ने ही इन्हें लक्षित (Target) करने के लिए ठोस रणनीतिक कदम उठाए हैं। यानी 85% ब्रांड्स अभी भी इस सुनहरे अवसर को गंवा रहे हैं।

आबादी का गणित: दुनिया का हर 5वां युवा भारत में

Snap Inc. और बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) की रिपोर्ट के अनुसार:

  • संख्या और हिस्सेदारी: भारत में Gen Z की आबादी 37.7 करोड़ है, जो देश की कुल आबादी का 27% है।
  • युवा शक्ति: विश्व भर के कुल युवाओं में से हर 5 में से 1 युवा भारत में रहता है
  • PRICE थिंक टैंक के मुताबिक, 2025 तक 15 से 29 साल की उम्र के लोगों की संख्या 42 करोड़ तक पहुँच चुकी है, जो देश की आबादी का लगभग 29% है।

कितना बड़ा है Gen Z का खर्च? (Spends Breakdown)

Deloitte-FICCI और BCG-Snap Inc. ('The $2 Trillion Opportunity') की रिपोर्ट के अनुसार:

  • डायरेक्ट स्पेंडिंग: Gen Z का खुद कमाकर खर्च किया गया पैसा $250 बिलियन (करीब ₹23.85 लाख करोड़) है।
  • कुल उपभोग (Total Consumption): भारत के कुल उपभोग का 43% हिस्सा Gen Z से प्रभावित है। इनका कुल खर्च $860 बिलियन (₹82.07 लाख करोड़) है।
  • इन्फ्लुएंस स्पेंड: इस खर्च में $660 बिलियन (₹62.98 लाख करोड़) का वह खर्च शामिल है जो Gen Z अपने माता-पिता और परिवार की खरीदारी निर्णयों पर प्रभाव डालकर करवाता है।

भविष्य की रफ्तार:

विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2035 तक Gen Z की कुल खर्च क्षमता बढ़कर $2 ट्रिलियन (लगभग ₹190 लाख करोड़) पहुँच जाएगी, जो भारत के आज के कुल उपभोग से भी अधिक है।

Gen Z की खरीदारी के 5 अनोखे तरीके

  1. शॉपशियलाइजिंग (Shopsializing): यह पीढ़ी दुकान में खड़े होकर भी फोन पर क्रिएटर्स के पेज, विशलिस्ट और रिव्यू चेक करती है। यह आदत मिलेनियल्स से 1.5 गुना अधिक है।
  2. इन्फ्लुएंसर इंस्पिरेशन: 72% Gen Z खरीदारी की प्रेरणा के लिए ऑनलाइन कंटेंट क्रिएटर्स पर निर्भर हैं।
  3. शॉपिंग ऐप्स का प्रभुत्व: 10 में से 8 युवा Amazon, Flipkart और Meesho जैसे ऐप्स से खरीदारी करते हैं।
  4. ट्रेंड ओवर ब्रांड लॉयल्टी: ये ब्रांड लॉयल्टी से ज्यादा ट्रेंडिंग स्टाइल को प्राथमिकता देते हैं (मिलेनियल्स की तुलना में 1.7 गुना ज्यादा ट्रेंड-फोकस्ड)।
  5. टियर-II और III शहरों से ग्रोथ: 60% से अधिक ई-कॉमर्स ट्रांजैक्शन छोटे शहरों और कस्बों से हो रहे हैं, जहाँ Gen Z उतनी ही डिजिटली एक्टिव है।

कमाई, लाइफस्टाइल और क्रेडिट ट्रेंड्स

  • औसत वेतन: Gen Z की औसतन शुरुआती सैलरी ₹20,000 से ₹27,000 प्रति माह है।
  • ट्रैवल और क्रेडिट: Cleartrip के आंकड़ों के मुताबिक, Gen Z की बुकिंग्स में 650% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। 2025 की पहली छमाही में लिए गए 27% पर्सनल लोन का इस्तेमाल ट्रैवल के लिए हुआ।
  • लग्जरी ऑन EMI: 70% युवाओं की विशलिस्ट में इंटरनेशनल लग्जरी ब्रांड्स हैं, जिन्हें वे EMI और नो-कॉस्ट क्रेडिट के जरिए खरीद रहे हैं।

ब्रांड्स को क्या करने की जरूरत है?

  • ऑथेंटिसिटी (प्रामाणिकता): Gen Z को केवल बेचने के उद्देश्य से चलाए जाने वाले कैंपेन (Performative Campaigns) पसंद नहीं आते। ब्रांड्स को उनकी समस्याओं का वास्तविक समाधान देना होगा।
  • कम्युनिटी का अहसास: यह पीढ़ी सिर्फ सामान नहीं खरीदना चाहती, बल्कि उस ब्रांड की कम्युनिटी और पहचान का हिस्सा बनना चाहती है।
  • ऑनलाइन रिटेल का भविष्य: Deloitte के अनुसार, भारत का ऑनलाइन रिटेल मार्केट 2024 के $75 बिलियन से बढ़कर 2030 तक $260 बिलियन हो जाएगा, और इसकी मुख्य चालक यही Gen Z होगी।