नई दिल्ली। भारत अपनी BRICS अध्यक्षता (BRICS Chairship 2026) के तहत 12-13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच सीमा पार डिजिटल भुगतान (Cross-border Digital Payments) और सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) के उपयोग को आसान बनाने का प्रस्ताव रखेगा। इस सम्मेलन के साथ ही BRICS संगठन के 20 साल भी पूरे हो रहे हैं।

भारत के प्रस्ताव और रणनीतिक पहल के मुख्य बिंदु

  • राष्ट्रीय मुद्राओं (Local Currencies) में व्यापार: भारत सदस्य देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में राष्ट्रीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ाने और लेनदेन लागत (Transaction Costs) को कम करने पर जोर देगा।
  • फास्ट पेमेंट सिस्टम का एकीकरण: भारत अपने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) को ब्रिक्स सदस्य व पार्टनर देशों के पेमेंट सिस्टम से जोड़ने का खाका पेश करेगा।
  • डी-डॉलराइजेशन से दूरी: भारत ने स्पष्ट किया है कि यह पहल किसी तीसरे देश या अमेरिकी डॉलर के खिलाफ नहीं है। ब्रिक्स के भीतर 'डी-डॉलराइजेशन' का कोई एजेंडा नहीं चलाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य केवल व्यापारिक सुगमता और सुरक्षित भुगतान ढांचा तैयार करना है।

CBDC के इस्तेमाल में मुख्य चुनौतियां

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अपने डिजिटल रुपये (e-Rupee) के पायलट प्रोजेक्ट को विस्तार देते हुए सीमा पार लेनदेन में इसके इस्तेमाल की संभावनाएं तलाश रहा है। हालांकि, ब्रिक्स के स्तर पर इसे लागू करने में कुछ प्रमुख व्यावहारिक चुनौतियां हैं:

  1. इंटरऑपरेबिलिटी (Interoperability): अलग-अलग देशों की डिजिटल करेंसी प्रणालियों को तकनीकी और नियामक स्तर पर एक साथ जोड़ना सबसे बड़ी चुनौती है।
  2. तकनीकी व सुरक्षा तालमेल: चीन और भारत जैसे देशों में CBDC के पायलट प्रोजेक्ट चल रहे हैं, लेकिन कई अन्य ब्रिक्स देशों में अभी इसके लिए तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर और कानूनी नियम पूरी तरह तैयार नहीं हैं।

व्यापार सुगमता और वैल्यू चेन पर फोकस

डिजिटल करेंसी के अलावा, शिखर सम्मेलन में सीमा शुल्क (Customs) सहयोग समझौते को गति देने और 2026-30 के लिए 'ग्लोबल वैल्यू चेन' (GVC) पर रणनीतिक साझेदारी बढ़ाने पर भी सहमति बनाने की कोशिश होगी। इससे क्षेत्रीय सप्लाई चेन को अधिक मजबूत, पारदर्शी और तीव्र बनाया जा सकेगा।