मध्यप्रदेश: मध्यप्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2026 को 'कृषि वर्ष' के रूप में मनाए जाने के तहत किसानों और कृषि क्षेत्र के उत्थान के लिए बड़ा निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन एवं कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना के निर्देशन में मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड ने प्रदेश की कृषि उपज मंडी समितियों का नवीन वर्गीकरण जारी किया है।
अंतिम बार वर्गीकरण वर्ष 2016 में हुआ था। पिछले 10 वर्षों में मंडी शुल्क, आवक और विपणन गतिविधियों में आए व्यापक बदलावों को देखते हुए यह नया ढांचा तैयार किया गया है। मंडी बोर्ड के आयुक्त-सह-प्रबंध संचालक कुमार पुरुषोत्तम द्वारा जारी यह आदेश 19 अगस्त 2026 से प्रभावी हो गया है।
वर्गीकरण का आधार और मुख्य बदलाव
यह नवीन वर्गीकरण पिछले तीन वित्तीय वर्षों (2023-24, 2024-25 एवं 2025-26) की औसत कृषि उपज आवक और मंडी व अनुज्ञप्ति शुल्क से प्राप्त औसत वास्तविक आय के आधार पर किया गया है।
- कुल मंडियां: प्रदेश की कुल 259 कृषि उपज मंडी समितियों को नया ग्रेड दिया गया है (298 उपमंडियां इसके अतिरिक्त कार्यरत हैं)।
- 54 मंडियों का प्रमोशन: बेहतर आय और उपज आवक के बल पर 54 मंडियों ने उच्च वर्ग में क्रमोन्नति (प्रमोशन) पाई है।
- D ग्रेड में भारी कमी: पहले सबसे निचले 'D' वर्ग में 122 मंडियां थीं, जिनकी संख्या अब घटकर मात्र 68 रह गई है।
- संरक्षण की व्यवस्था: किसानों और समितियों के हित में निर्णय लिया गया है कि किसी भी मंडी को चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 (31 मार्च 2027 तक) निचले वर्ग में डिमोट नहीं किया जाएगा।
श्रेणी-वार मंडियों की संख्या में बदलाव
| मंडी का वर्गपूर्व वर्गीकरण (2016)नवीन वर्गीकरण (2026) | ||
| A वर्ग | 39 | 47 |
| B वर्ग | 42 | 63 |
| C वर्ग | 56 | 81 |
| D वर्ग | 122 | 68 |
| कुल | 259 | 259 |
नवीन वर्गीकरण के लिए निर्धारित मानक (आय एवं आवक)
| मंडी श्रेणीवार्षिक औसत आयवार्षिक औसत उपज आवक | ||
| A श्रेणी | ₹6 करोड़ से अधिक | 2.50 लाख मीट्रिक टन से अधिक |
| B श्रेणी | ₹3 से 6 करोड़ तक | 1.25 से 2.50 लाख मीट्रिक टन |
| C श्रेणी | ₹1.50 से 3 करोड़ तक | 0.50 से 1.25 लाख मीट्रिक टन |
| D श्रेणी | ₹1.50 करोड़ से कम | 0.50 लाख मीट्रिक टन से कम |
किसानों और मंडी व्यवस्था पर प्रभाव
इस नए ग्रेडेशन से मंडी समितियों की प्रशासनिक संरचना में सुधार होगा और अधिकारियों-कर्मचारियों के वित्तीय अधिकारों में बढ़ोतरी होगी। मंडियों में हम्माल, तुलावटी व नए व्यापारियों के लाइसेंस आवंटन की प्रक्रिया सुगम होगी। स्थानीय स्तर पर बुनियादी ढांचे का विस्तार होने से किसानों को उपज का सही मूल्य और बेहतर विपणन सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।





